देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य महाराज को संस्कृत भाषा और साहित्य के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान हेतु प्रतिष्ठित ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार-2023’ से सम्मानित किया गया है। राज्य के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने इस सम्मान पर हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें आत्मीय बधाई दी है।
उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि संस्कृत भाषा और दर्शन को जन-जन तक पहुंचाने के लिए जगद्गुरु ने जो अनथक साधना की है, वह एक युगद्रष्टा संत की पहचान है। ज्ञानपीठ जैसा सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान उनके तप और कर्म की स्वीकृति है। यह केवल एक संत का नहीं, अपितु सम्पूर्ण भारतीय संस्कृति और परंपरा का गौरव है।
उल्लेखनीय है कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य जन्म से दृष्टिबाधित होने के बावजूद रामायण, महाभारत, वेद, उपनिषद, दर्शन और संस्कृत साहित्य में अप्रतिम विद्वान हैं। वे अनेक भाषाओं में निपुण हैं और उन्होंने दर्जनों ग्रंथों की रचना की है।
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