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Monday, May 25, 2026
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लोकसभा विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण सरकार की प्राथमिकता: किरेन रिजिजू

उन्होंने कहा कि सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति के अभिभाषण से हुई, जिस पर दोनों सदनों में धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया गया। इसके बाद केंद्र सरकार ने यूनियन बजट पेश किया।  

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संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने कहा कि संसद का बजट सत्र आज आधिकारिक रूप से संपन्न हो गया। 28 जनवरी से शुरू हुआ यह सत्र 18 अप्रैल तक चला और इसे हाल के वर्षों के सबसे ऐतिहासिक और प्रोडक्टिव सत्रों में गिना जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति के अभिभाषण से हुई, जिस पर दोनों सदनों में धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया गया। इसके बाद केंद्र सरकार ने यूनियन बजट पेश किया, जिसे विस्तृत चर्चा के बाद सफलतापूर्वक पारित कर दिया गया। साथ ही, फाइनेंस बिल भी संसद से पास हुआ।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सत्र के दूसरे चरण में प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया में चल रहे संकट पर दोनों सदनों में महत्वपूर्ण बयान दिया। वहीं, संसद का कामकाज पूरा करने के लिए बजट सत्र को तीन दिनों के लिए बढ़ाया भी गया।

उन्होंने कहा कि अगर देश के मौजूदा हालात की बात करें, तो सरकार का दावा है कि लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज्म अब लगभग खत्म होने की कगार पर है। नॉर्थ ईस्ट में भी, मणिपुर को छोड़कर अधिकांश इलाकों में शांति बहाल की गई है, जो देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। कुल मिलाकर, यह बजट सत्र कई अहम फैसलों और राष्ट्रीय मुद्दों पर सार्थक चर्चा के लिए याद किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर मैं एक बात कहना चाहता हूं कि राजनीति से प्रेरित होकर और महिलाओं को अधिकार न देने की मानसिकता के कारण कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस संवैधानिक संशोधन को दो-तिहाई बहुमत से पारित नहीं होने दिया। इस बात से हम सभी बेहद दुखी हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह दुख सिर्फ सरकार या किसी पार्टी का नहीं है, बल्कि देश की महिलाओं का नुकसान हुआ है। महिलाओं को देश के संचालन और निर्णय प्रक्रिया में पूर्ण भागीदारी देने के लिए, लोकसभा और विधानसभाओं में उन्हें उचित प्रतिनिधित्व देने का जो महत्वपूर्ण कदम था, वह पारित नहीं हो सका इससे हम सभी आहत हैं।

उन्होंने कहा कि हम इसे सरकार या अपनी पार्टी की विफलता नहीं मानते, बल्कि इसे देश के लिए एक बड़ा आघात मानते हैं, जो कांग्रेस पार्टी और कुछ अन्य दलों ने पहुंचाया है। आने वाले समय में उन्हें महिलाओं के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा।

कांग्रेस पार्टी पर महिला विरोधी होने का जो दाग लगा है, वह आसानी से मिटने वाला नहीं है। महिलाओं को अधिकार न देकर इसका जश्न मनाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और गलत है। क्या आपने दुनिया में कहीं देखा है कि महिलाओं को उनका अधिकार न देकर कोई इसे अपनी जीत बताता हो?

उन्होंने कहा कि लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण देना हम सबकी प्राथमिकता है और इसे लागू होना चाहिए। लेकिन कांग्रेस और उसके सहयोगियों की मानसिकता ने इस बिल को गिरा दिया, और फिर उस पर जश्न मनाना उनकी सोच को साफ दर्शाता है। उन्होंने कहा कि अब बहानेबाजी नहीं चलेगी। सीधी और स्पष्ट बात है महिलाओं को जो अधिकार मिलना चाहिए था, उसे कांग्रेस और उसके साथियों ने रोक दिया।

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