पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले आरजी कर मेडिकल कॉलेज बलात्कार-हत्या कांड की पीड़िता की मां ने बड़ा राजनीतिक ऐलान किया है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के टिकट पर चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है और राज्य में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है।
मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, “मैंने बस यह तय किया कि मैं यह चुनाव BJP उम्मीदवार के तौर पर लड़ना चाहता हूँ। यह आखिरी मिनट में तय नहीं हुआ था।” यानी यह फैसला अचानक नहीं लिया गया, बल्कि पहले से इस पर विचार किया जा रहा था। उन्होंने आगे कहा, “हमें इसके बारे में पहले भी बताया गया था, लेकिन मैं इसके लिए तैयार नहीं थी। मुझे एहसास हुआ कि यहां महिलाओं की सुरक्षा और लोगों की भलाई के साथ बहुत समझौता किया जाता है।” जिससे उन्होंने राज्य में कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल उठाए।
पीड़िता की मां ने स्पष्ट रूप से कहा वह तृणमूल को उखाड़ फेंकने के लिए भाजपा में शामिल हुई है। उन्होंने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरने का संकेत दिया। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 23 और 28 अप्रैल को प्रस्तावित हैं, जिसके चलते राजनीतिक माहौल पहले से ही गर्म है।
So the mother of the RG Kar rape victim Abhaya is BJP's candidate from panihati.
She will be fighting against the son of Nirmal Ghosh, who hurriedly burnt the body without her parents' approval.
It's time Panihati rises up for their daughter! Lead the way! pic.twitter.com/p7LoYvtYxo— Promita Mukherjee🇮🇳 (@promzzz) March 19, 2026
बता दें की, आरजी कर मामला अगस्त 2024 का है। कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक जूनियर डॉक्टर के साथ कथित तौर पर बलात्कार के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी। इस मामले ने पूरे देश में आक्रोश पैदा कर दिया था। मामले में आरोपी संजय रॉय को बाद में गिरफ्तार किया गया और अदालत ने उसे बलात्कार और हत्या के अपराध में उम्रकैद की सजा सुनाई।
अब पीड़िता की मां का चुनाव लड़ने का फैसला इस मुद्दे को एक बार फिर राजनीतिक केंद्र में ले आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम राज्य में महिलाओं की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और न्याय के मुद्दों को चुनावी बहस का प्रमुख हिस्सा बना सकता है। कुल मिलाकर, यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है, जहां एक संवेदनशील आपराधिक मामला अब सीधे चुनावी विमर्श से जुड़ गया है।
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