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ट्रंप के ईरान अल्टीमेटम पर रूस बोला, राजनीतिक समाधान ही बेहतर विकल्प!

रूस ने बुशहर परमाणु पावर प्लांट को निशाना बनाए जाने की धमकी को भी गलत बताया है। पेसकोव ने कहा कि ईरान में बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट के पास यूएस-इजरायली हमले बहुत खतरनाक हैं|  

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया, इसके बाद तेहरान ने भी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी थी। दुनिया इन बयानों से चिंतित है क्योंकि अगर बुशहर परमाणु प्लांट पर हमला होता है तो इससे गंभीर मानवीय संकट पैदा हो सकता है। रूस की राय है कि तनाव कम करने पर जोर दिया जाना चाहिए।

रूस को लगता है कि मामले को राजनीतिक और रणनीतिक तरीके से सुलझाया जा सकता है। क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा, “हमारा मानना ​​है कि मामले को राजनीतिक और रणनीतिक तरीके से सुलझाया जाना चाहिए।”

पेसकोव ने कहा, “यही ऐसे तरीके हैं जिससे इलाके में व्याप्त तनाव को असरदार तरीके से कम किया जा सकता है।”

रूस ने बुशहर परमाणु पावर प्लांट को निशाना बनाए जाने की धमकी को भी गलत बताया है। पेसकोव ने कहा कि ईरान में बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट के पास यूएस-इजरायली हमले बहुत खतरनाक हैं और रूस ने अपनी बात अमेरिका तक पहुंचा दी है, साथ ही कहा कि ऐसे हमलों के नतीजे भयावह हो सकते हैं जिसकी भरपाई नहीं हो सकती।

पेसकोव ने कहा, “हमारा मानना ​​है कि न्यूक्लियर फैसिलिटी पर हमले बहुत खतरनाक हो सकते हैं… इसलिए, रूसी पक्ष ने इस मुद्दे पर बहुत जिम्मेदार रुख अपनाते हुए, बार-बार अपनी चिंताएं जाहिर की हैं।”

हाल ही में ईरान के नतांज परमाणु परिसर पर भी हमला किया गया था। रूस ने तब भी इस हमले की निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन करार दिया था। इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (आईएईए) ने भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा था कि रेडियोएक्टिव रिसाव नहीं हुआ, लेकिन एहतियात बरता जाना चाहिए।

संघर्ष शुरू होने के बाद नतांज पर ये दूसरा हमला था। 2 मार्च को भी इस प्लांट को निशाने पर लिया था। यह ईरान का सबसे बड़ा परमाणु केंद्र है, यहां यूरेनियम एनरिचमेंट किया जाता है। इस्फहान में मौजूद इस केंद्र की खास बात यह है कि इसका बड़ा हिस्सा जमीन के नीचे बना हुआ है।

2 मार्च को हुए हमले के बाद 3 मार्च को इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (आईएईए) ने पुष्टि की थी कि ईरान के नतांज न्यूक्लियर फैसिलिटी में प्रवेश द्वार के पास मौजूद इमारतों को थोड़ा नुकसान पहुंचा है।

नतांज फैसिलिटी जून में इजरायल और ईरान के बीच 12-दिन के युद्ध में मुख्य टारगेट में से एक थी, जिसमें यूएस भी आखिरकार शामिल हो गया था।

 
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