सुभाष यादव ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि साधु यादव को बचपन से ही मुझसे जलन रही है। जब मैं दो साल का था, तब भी उन्होंने मेरे साथ मारपीट की थी। आज भी वे लगातार मेरे खिलाफ अनाप-शनाप बयान देते रहते हैं। अब उन्हें चेत जाना चाहिए, नहीं तो अंजाम अच्छा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि साधु यादव बार-बार उनका नाम विभिन्न लोगों के साथ जोड़कर उनकी छवि खराब करने की कोशिश करते हैं।
सुभाष यादव ने कहा कि वे कभी शहाबुद्दीन का नाम लेते हैं, कभी सतीश पांडे का, कभी किसी और का। यह गलत है। उन्हें अपने नाम के अनुरूप साधु की तरह व्यवहार करना चाहिए और दूसरों के नाम उछालना बंद करना चाहिए।
सतीश पांडे को लेकर दिए गए बयानों पर भी उन्होंने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि जिन लोगों का नाम लिया जा रहा है, वे अपने क्षेत्र में विकास कार्य कर रहे हैं और गरीबों के लिए काम कर रहे हैं। ऐसे में अनावश्यक रूप से किसी का नाम विवाद में घसीटना गलत है।
राजद द्वारा विधान परिषद चुनाव में सुनील सिंह को उम्मीदवार बनाए जाने पर भी सुभाष यादव ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यह फैसला तेजस्वी यादव का व्यक्तिगत निर्णय हो सकता है, लेकिन पार्टी के कार्यकर्ताओं और परिवार के कई लोग इससे खुश नहीं हैं।
सुभाष यादव ने दावा किया कि इस फैसले से राजद के कई कार्यकर्ता असंतुष्ट हैं। उन्होंने कहा कि रोहिणी आचार्य ही नहीं, परिवार के कई लोग इस फैसले से नाराज हैं। हालांकि अंतिम निर्णय तेजस्वी यादव का है और पार्टी उनकी है, इसलिए उन्होंने जिसे उचित समझा, उसे उम्मीदवार बनाया।
लालू प्रसाद यादव के साथ अपने पुराने संबंधों को याद करते हुए सुभाष यादव ने कहा कि वे शुरुआती दौर से ही उनके साथ जुड़े रहे हैं। उन्होंने कहा कि 1986 से ही हम लालू यादव के साथ रहे हैं। उस समय जब कोई व्यवस्था नहीं होती थी, तब हम उनके लिए खाना बनाते थे, लिट्टी-चोखा तैयार करते थे और हर तरह से सहयोग करते थे। राजनीति में आने की मेरी कोई इच्छा नहीं थी, लेकिन लालू यादव के कहने पर ही मैं सार्वजनिक जीवन में आया।
उन्होंने कहा कि बिहार की राजनीति में कई नेताओं ने अलग-अलग समय पर सरकारों को सहयोग दिया है और उस दौर की परिस्थितियां आज से भिन्न थीं। उन्होंने कहा कि गठबंधन की राजनीति में सभी दलों और नेताओं का सहयोग आवश्यक होता था।
सुभाष यादव ने आगे कहा कि उनका उद्देश्य किसी विवाद को बढ़ाना नहीं है, लेकिन यदि उनके खिलाफ व्यक्तिगत आरोप लगाए जाते रहे तो वे भी तथ्यों के साथ जवाब देंगे। उन्होंने कहा कि मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि मेरे नाम का इस्तेमाल कर बेवजह बयानबाजी न की जाए। अगर ऐसा जारी रहा तो मैं भी खुलकर अपनी बात रखूंगा।
