सरकारी सूत्रों के अनुसार, इन मुलाकातों की कड़ी पहलगाम में हुए भीषण आतंकवादी हमले के बाद उत्पन्न सुरक्षा चिंताओं से जुड़ी है, जिसमें 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई थी। हमले के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने शीर्ष रक्षा अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक कर सशस्त्र बलों को “पूर्ण अभियानगत स्वतंत्रता” दिए जाने का ऐलान किया था, ताकि वे उपयुक्त समय, स्थान और रणनीति के अनुसार जवाबी कार्रवाई तय कर सकें।
प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक में आतंकवाद के खिलाफ कठोर रुख और निर्णायक कार्रवाई के राष्ट्रीय संकल्प को दोहराया था। उन्होंने कहा था कि अब समय आ गया है जब आतंकवाद को उसकी भाषा में जवाब दिया जाए।
हालिया बैठकों को देखते हुए संकेत मिल रहे हैं कि भारत की सैन्य रणनीति को लेकर अहम फैसले जल्द लिए जा सकते हैं। रक्षा सचिव के साथ प्रधानमंत्री की यह मुलाकात न केवल वर्तमान सुरक्षा परिदृश्य की गहन समीक्षा है, बल्कि आने वाले समय में संभावित कूटनीतिक और सामरिक कदमों की नींव भी हो सकती है।
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