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Saturday, April 4, 2026
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तेलंगाना का नया कानून: माता-पिता की अनदेखी पर सैलरी से कटेंगे पैसे

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तेलंगाना सरकार ने माता-पिता के अधिकारों की रक्षा के लिए एक अहम कदम उठाते हुए नया कानून पारित किया है। ‘तेलंगाना कर्मचारी जवाबदेही और माता-पिता के समर्थन की निगरानी विधेयक, 2026’ के तहत अब अपने आश्रित माता-पिता की उपेक्षा करने पर कर्मचारियों की सैलरी से सीधे कटौती की जा सकेगी।

इस कानून के तहत दोषी पाए जाने पर कर्मचारी की सैलरी का अधिकतम 15% या ₹10,000 (जो भी कम हो) काटा जाएगा। यह राशि सीधे संबंधित माता-पिता के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी। इस विधेयक की खास बात यह है कि इसका दायरा बेहद व्यापक है। यह केवल सरकारी और निजी कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सांसद, विधायक, नामित सदस्य और स्थानीय निकायों के निर्वाचित प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंथ रेड्डी ने विधानसभा में चर्चा के दौरान कहा कि माता-पिता की देखभाल सामाजिक जिम्मेदारी होनी चाहिए, लेकिन जहां यह जिम्मेदारी निभाई नहीं जाती, वहां कानून हस्तक्षेप करेगा। उन्होंने कहा कि यह कानून सुनिश्चित करेगा कि समाज में हर व्यक्ति एक जिम्मेदार उदाहरण पेश करे।

अगर कोई वरिष्ठ नागरिक खुद को उपेक्षित महसूस करता है, तो वह जिला कलेक्टर के पास शिकायत दर्ज करा सकता है। कलेक्टर को 60 दिनों के भीतर मामले का निपटारा करना होगा।

सुनवाई के दौरान, माता-पिता और कर्मचारी दोनों की बात सुनी जाएगी। कर्मचारी की आय और परिस्थितियों का आकलन होगा। इसके बाद सैलरी कटौती का आदेश जारी किया जाएगा। विधेयक में ‘वरिष्ठ नागरिक आयोग’ बनाने का भी प्रावधान है, जो कलेक्टर के फैसलों के खिलाफ अपील सुनेगा। इस आयोग की अध्यक्षता एक सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज करेंगे और इसमें प्रशासन व सामाजिक क्षेत्र के विशेषज्ञ सदस्य होंगे।

यह कानून केवल जैविक माता-पिता तक सीमित नहीं है, बल्कि सौतेले माता-पिता को भी इसके दायरे में शामिल किया गया है, जिससे अधिक लोगों को संरक्षण मिलेगा।

हालांकि पहले से माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम मौजूद है, लेकिन सरकार का मानना है कि यह नया कानून अधिक प्रभावी और लागू करने योग्य व्यवस्था प्रदान करेगा।

यदि माता-पिता में से एक की मृत्यु हो जाती है, तो जीवित माता-पिता कटौती की राशि अपने खाते में ट्रांसफर कराने के लिए आवेदन कर सकता है। दोनों के निधन की स्थिति में कर्मचारी कटौती आदेश रद्द कराने के लिए आवेदन कर सकता है।

इस कानून को जहां कई लोग वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम मान रहे हैं, वहीं कुछ विशेषज्ञ इसे निजी मामलों में राज्य के हस्तक्षेप के रूप में भी देख रहे हैं। फिलहाल, यह कानून समाज में पारिवारिक जिम्मेदारी को कानूनी रूप देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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