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आपातकाल भारत के इतिहास पर लगे सबसे काले धब्बों में से एक : किशन रेड्डी!

केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने इमरजेंसी की बरसी के मौके पर ‘एक्स’ पर अपने विचार साझा किए। बीजेपी इस दिन को ‘संविधान हत्या दिवस’ के तौर पर मना रही है।

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केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने 25 जून 1975 को स्वतंत्र भारत के इतिहास पर सबसे काले धब्बों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि इसी दिन लगाए गए आपातकाल ने मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया। अभिव्यक्ति की आजादी को दबा दिया, प्रेस पर सेंसरशिप लगा दी और राजनीतिक विरोधियों, पत्रकारों और कार्यकर्ताओं को बिना मुकदमे के जेल में डाल दिया।

केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने इमरजेंसी की बरसी के मौके पर ‘एक्स’ पर अपने विचार साझा किए। बीजेपी इस दिन को ‘संविधान हत्या दिवस’ के तौर पर मना रही है।

किशन रेड्डी ने कहा, “जब हम ‘संविधान हत्या दिवस’ मना रहे हैं, तो हम उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि देते हैं, जिन्होंने हिम्मत के साथ तानाशाही का विरोध किया और लोकतंत्र व संविधान की रक्षा के लिए मजबूती से डटे रहे। उनके बलिदानों ने यह सुनिश्चित किया कि अभूतपूर्व चुनौतियों के बावजूद भारत की लोकतांत्रिक भावना बनी रहे।”

उन्होंने कहा, “आइए हम संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने, लोकतांत्रिक संस्थाओं को मज़बूत करने और उन आज़ादियों की हिफ़ाज़त करने के अपने अटूट संकल्प को दोहराएं, जो हमारे गणतंत्र की नींव है।”

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री बंदी संजय कुमार ने कहा कि सत्ता की भूख के कारण कांग्रेस पार्टी ने संविधान को कमजोर करने की साजिश रची।

संजय कुमार ने कहा, “एक अघोषित तानाशाही जिसने नागरिक अधिकारों को कुचला और असहमति की आवाज़ों को दबाया। एक बेरहम शासन जिसने प्रेस की आज़ादी पर कड़ी पाबंदियां लगाईं… कांग्रेस द्वारा थोपे गए ‘आपातकाल’- एक ऐसा कदम जिसने ‘भारत माता’ की आत्मा को बंधक बना लिया और लोकतंत्र का मजाक उड़ाया।”

उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपनी जान देने वाले नायकों के बलिदान का सम्मान करने और संविधान की रक्षा के लिए प्रयास करने का आह्वान किया।

तेलंगाना भाजपा अध्यक्ष एन. रामचंद्र राव ने याद दिलाया कि इमरजेंसी के दिनों में जबरन नसबंदी अभियान के तहत सरकारी अधिकारियों को कोटा दिया गया था।

उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया कि उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में स्कूल शिक्षकों को धमकी दी गई कि अगर उन्होंने नसबंदी करवाने के लिए एक निश्चित संख्या में लोगों को “प्रेरित” नहीं किया, तो उनकी सैलरी रोक दी जाएगी।

इमरजेंसी के दौरान मशहूर गायक किशोर कुमार के गानों पर रेडियो और टीवी पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। उस समय उनके गीत 1970 के दशक के सबसे लोकप्रिय गानों में गिने जाते थे। बताया जाता है कि किशोर कुमार ने ‘गीतों भरी शाम’ कार्यक्रम में गाने से इनकार कर दिया था। यह कार्यक्रम यूथ कांग्रेस द्वारा संजय गांधी के नसबंदी अभियान के लिए धन जुटाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था।

भाजपा नेता ने यह भी याद दिलाया कि जस्टिस जगमोहन सिन्हा, जिन्होंने इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री पद से अयोग्य ठहराने वाला फैसला लिखा था, उन्हें प्रयागराज के कांग्रेस सांसद ने बहुत परेशान किया था और उन्हें अपना फैसला लिखने के लिए दस दिनों तक छिपकर रहना पड़ा था।

उन्होंने कहा, “एक स्पेशल सीआईडी टास्क फोर्स ने भी जस्टिस जगमोहन सिन्हा के फैसले को खोजने की कोशिश की और देर रात उनके सेक्रेटरी को धमकाया। कांग्रेस इसी तरह संस्थाओं पर दबाव बनाती थी और आज वह बेशर्मी से संविधान की बात करती है।”

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