सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अंग्रेजों ने काकोरी ट्रेन एक्शन को ‘डकैती’ कहा, लेकिन दुर्भाग्य से स्वतंत्र भारत में सत्ता में आए लोगों ने भी लंबे समय तक इसे ‘काकोरी डकैती कांड’ कहकर क्रांतिकारियों को सम्मान देने के बजाय अपमानित करने का काम किया। काकोरी और चौरी चौरा जैसी घटनाओं को भी इतिहास में उचित स्थान नहीं दिया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की आजादी किसी एक व्यक्ति या एक विचारधारा के प्रयासों का परिणाम नहीं थी। लाखों लोगों ने अलग-अलग मोर्चों पर संघर्ष किया और अनेक क्रांतिकारियों ने अपना सर्वस्व न्योछावर किया। इन बलिदानों को भुलाना देश की युवा पीढ़ी को उसके प्रेरणास्रोतों से दूर करने जैसा है।
चौरी चौरा की घटना का उल्लेख करते हुए सीएम योगी ने कहा कि उस घटना के बाद कांग्रेस ने अपना आंदोलन स्थगित कर दिया था। उन्होंने कहा कि पंडित मदन मोहन मालवीय ने चौरी चौरा के आरोपियों का मुकदमा लड़ा था, जबकि कुछ स्थानीय नेताओं की भूमिका क्रांतिकारियों के खिलाफ पैरवी करने में रही।
उन्होंने कहा कि आज भी जाति और क्षेत्र के नाम पर समाज को बांटकर भारत को कमजोर करने वाली ताकतें सक्रिय हैं। उन्होंने सोशल मीडिया को भी भारत विरोधी दुष्प्रचार का नया माध्यम बताते हुए कहा कि भारत विरोधी ताकतें इसका दुरुपयोग कर रही हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से अफवाहें फैलाने और समाज को गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने युवाओं से ऐसे किसी भी दुष्प्रचार से सावधान रहने की अपील की। सीएम योगी ने कहा कि जिन लोगों ने देश की युवा पीढ़ी को उसके क्रांतिकारी नायकों से दूर रखा, उन्होंने युवाओं के साथ सबसे बड़ा अन्याय किया। किसी नौजवान को अपने नायकों पर गौरव करने का अवसर नहीं देना उसे उसके आदर्श और प्रेरणास्रोत से विमुख करने जैसा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि आजादी के बाद सत्ता संभालने वालों ने लंबे समय तक ऐसा ही किया। स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अनेक नायकों और वीरांगनाओं को इतिहास में वह स्थान नहीं दिया गया, जिसके वे हकदार थे।
उन्होंने कहा कि लंबे समय तक स्वतंत्रता संग्राम के नायकों के सम्मान को लेकर भी राजनीति होती रही। साल 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के स्वतंत्रता संग्राम के नायकों और शहीदों को सम्मान देने का काम हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद लंबे समय तक देश में नामकरण की राजनीति भी एक परिवार और एक खानदान तक सीमित रही। अब देश के उन नायकों को सम्मान दिया जा रहा है, जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता और राष्ट्र निर्माण में अपना सर्वस्व अर्पित किया।
उन्होंने कहा कि काकोरी ट्रेन एक्शन केवल इतिहास की एक घटना नहीं है, बल्कि यह देश के युवाओं को राष्ट्रभक्ति, साहस और बलिदान की प्रेरणा देने वाला अध्याय है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम के वास्तविक नायकों और उनके संघर्ष से जोड़ना आवश्यक है।
