TMC को एक और झटका, सुष्मिता देव ने राज्यसभा से दिया इस्तीफा; दो दिन में दूसरा बड़ा नुकसान

सुखेंदु शेखर रॉय के बाद अब सुष्मिता देव के इस्तीफे से ममता बनर्जी की पार्टी में बढ़ा राजनीतिक संकट

TMC को एक और झटका, सुष्मिता देव ने राज्यसभा से दिया इस्तीफा; दो दिन में दूसरा बड़ा नुकसान

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तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर जारी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को एक और बड़ा झटका लगा है। बुधवार (10 जून) को राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इससे पहले पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में 13 वर्षों तक मुख्य सचेतक रहे सुखेंदु शेखर रॉय भी इस्तीफा दे चुके हैं। लगातार दो इस्तीफों ने पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और संकट को और गहरा कर दिया है।

बताया जा रहा है कि हाल ही में 61 विधायकों ने बागी नेता ऋतब्रता बनर्जी के समर्थन में अपनी ताकत दिखाई थी, जिसके बाद पार्टी के अंदर मतभेद खुलकर सामने आ गए। अब यह असंतोष संसद तक पहुंचता दिखाई दे रहा है।

सुष्मिता देव पहले आसाम के सिलचर लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस की सांसद रह चुकी हैं। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी थी और 2021 में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गई थीं। पार्टी में शामिल होने के बाद उन्होंने तेजी से अपनी पहचान बनाई और उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता की जिम्मेदारी सौंपी गई। बाद में उन्हें राज्यसभा भेजा गया।

सुष्मिता देव ने राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन को पत्र लिखकर अपने इस्तीफे को तत्काल प्रभाव से स्वीकार करने का अनुरोध किया है। हालांकि, उन्होंने अपने इस्तीफे के कारणों का सार्वजनिक रूप से उल्लेख नहीं किया है।

इससे पहले सुखेंदु शेखर रॉय ने भी राज्यसभा सदस्यता छोड़ते हुए ममता बनर्जी को एक कड़ा पत्र लिखा था। अपने पत्र में उन्होंने आरोप लगाया था कि पश्चिम बंगाल की जनता ने पार्टी के व्यापक भ्रष्टाचार, महिलाओं पर अत्यधिक अत्याचार, और शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, रोजगार तथा कानून-व्यवस्था सहित विभिन्न क्षेत्रों में व्याप्त अराजकता और विफलता को खारिज कर दिया है।

उन्होंने अपने पत्र में लिखा था, “बंगाल के इतिहास में पहली बार, मतदाताओं ने भारतीय जनता पार्टी को सीटों के मामले में भारी जीत दिलाई है। नई चुनी गई सरकार ने अपने चुनावी वादों के मुताबिक, बंगाल के सर्वांगीण विकास और पुनर्निर्माण के लिए कई कार्यक्रमों को लागू करने का काम पहले ही शुरू कर दिया है।”

सुखेंदु शेखर रॉय के इस बयान को टीएमसी नेतृत्व के खिलाफ सीधी आलोचना के तौर पर देखा गया था। उनके इस्तीफे के कुछ ही दिनों बाद सुष्मिता देव के पद छोड़ने से यह संकेत मिल रहा है कि पार्टी के भीतर असंतोष का दायरा लगातार बढ़ रहा है।

लगातार सामने आ रहे घटनाक्रमों ने ममता बनर्जी के नेतृत्व और पार्टी की आंतरिक एकजुटता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में टीएमसी की राजनीतिक रणनीति और संगठनात्मक स्थिति पर इन घटनाओं का असर पड़ सकता है।

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