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यूसीसी पूरी तरह सांप्रदायिक एजेंडा, मुस्लिम पर्सनल लॉ रहना चाहिए बरकरार: सौगत रॉय!

पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की चर्चाओं पर टीएमसी के सांसद सौगत रॉय ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "यह पूरी तरह सांप्रदायिक एजेंडा है|  

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तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को गुमराह करने वाला एजेंडा बताया है। उन्होंने कहा कि जनता को गुमराह करने के लिए भाजपा की तरफ से जानकर किया जा रहा है।पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की चर्चाओं पर टीएमसी के सांसद सौगत रॉय ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “यह पूरी तरह सांप्रदायिक एजेंडा है और उनकी पार्टी इसका कड़ा विरोध करती है।
‘लव जिहाद’ केवल हिंदू सांप्रदायिक संगठनों द्वारा गढ़ा गया नारा है और इसके लिए अलग कानून बनाने की कोई आवश्यकता नहीं है। विवाह से जुड़े मौजूदा कानून पर्याप्त हैं और ऐसे मुद्दों को उठाने का उद्देश्य समाज में हिंदू-मुस्लिम विभाजन पैदा करना है। मुस्लिम समुदाय के लिए अलग पर्सनल लॉ बने रहने चाहिए।”

तारातला हादसे को लेकर रॉय ने पश्चिम बंगाल सरकार की कार्रवाई पर असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि केवल पिछली सरकार पर आरोप लगाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। अब सरकार और नगर निगम की जिम्मेदारी है कि हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उचित कार्रवाई करे।

31 जुलाई तक निर्माण कार्य रोकने के फैसले पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इससे विकास कार्यों में देरी होगी और नगर निगम को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

राम मंदिर चढ़ावा मामले पर सौगत रॉय ने कहा कि इस सिलसिले में कई लोगों की गिरफ्तारी हुई है और चंपत राय की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह भाजपा सरकार की बड़ी विफलता है और सवाल उठाया कि यदि अनियमितताओं की जानकारी थी तो पहले कार्रवाई क्यों नहीं की गई। दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

पार्टी के भीतर बागी गुट और चुनाव आयोग जाने के मुद्दे पर सौगत रॉय ने कहा कि संबंधित गुट को कोई कानूनी या संवैधानिक मान्यता प्राप्त नहीं है। उन्होंने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस की आधिकारिक संगठनात्मक सूची पहले ही चुनाव आयोग को सौंप दी गई है और पार्टी अध्यक्ष की मंजूरी के बिना किसी भी दावे का कोई कानूनी आधार नहीं है।

साथ ही उन्होंने विपक्ष के आरोपों पर कहा कि यदि सरकार के पास किसी के खिलाफ ठोस सबूत हैं तो कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई करे, लेकिन बिना जांच के बेबुनियाद आरोप लगाने से बचना चाहिए।
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