दरअसल, नासा ने सैटेलाइट तस्वीरों पर आधारित एक नया ग्लोबल मैप जारी किया है, जिसमें दिखाया गया है कि 2014 से 2022 के बीच पृथ्वी पर रात की रोशनी में कैसे बदलाव आया है? वैज्ञानिकों ने पृथ्वी की तस्वीर बनाने के लिए नौ सालों तक हर रात जमा की गई 16 लाख सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण किया। नतीजों से पता चला कि शहरी विकास के कारण उत्तरी भारत में, खासकर उत्तर प्रदेश और बिहार में, रात की रोशनी का स्तर बढ़ गया है।
बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश ने ऊर्जा क्षेत्र में बीते वर्षों में जो संरचनात्मक बदलाव किए हैं, उनका प्रभाव अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी दिखाई दे रहा है। गांव से शहर तक निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने नीति, प्रबंधन और तकनीक के स्तर पर व्यापक सुधार किए हैं।
प्रदेश में विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में तेजी से प्रगति हुई है। घाटमपुर तापीय विद्युत परियोजना की तीसरी इकाई का सफल सिंक्रनाइजेशन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। वहीं, ट्रांसमिशन और वितरण प्रणाली में सुधार के तहत नए उपकेंद्र स्थापित किए गए, जर्जर लाइनों का आधुनिकीकरण हुआ और स्मार्ट तकनीकों का उपयोग बढ़ा। इससे बिजली आपूर्ति अधिक स्थिर और निर्बाध हुई है, साथ ही लाइन लॉस में भी उल्लेखनीय कमी आई है।
योगी सरकार के कार्यकाल में बिजली क्षेत्र में डिजिटल तकनीकों का व्यापक इस्तेमाल हुआ है। उपभोक्ताओं को अब रियल टाइम खपत की जानकारी मिल रही है, ऑनलाइन सेवाएं आसान हुईं हैं और विद्युत चोरी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ है। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि उपभोक्ता संतुष्टि भी मजबूत हुई है।
निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति दी है। कृषि क्षेत्र में सिंचाई सुगम हुई है, उद्योगों को स्थिर बिजली मिली है और सेवा क्षेत्र में भी विस्तार देखने को मिला है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश अब निवेश के लिए एक भरोसेमंद गंतव्य के रूप में उभर रहा है।
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