केंद्र सरकार ने वंदे मातरम को लेकर राज्यसभा में एक ज़रूरी बिल पेश किया है। इस बिल के मुताबिक, वंदे मातरम को राष्ट्रगान जैसा ही दर्जा दिया गया है। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम एक्ट में अहम बदलाव किए हैं। इसके बाद यह बिल राज्यसभा में पेश किया गया है। इस बिल के नियमों के मुताबिक, भारत के राष्ट्रगान ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान (जन गण मन) जैसा संवैधानिक दर्जा और सम्मान देने का प्रस्ताव है।
इस एक्ट के नए सेक्शन के मुताबिक, पब्लिक में गाने या परफ़ॉर्मेंस के दौरान वंदे मातरम का अपमान करना कानूनी तौर पर सज़ा का मामला होगा। ऐसा करने वाले को 3 साल तक की जेल हो सकती है। इसके अलावा, इस नए बिल में पैसे का जुर्माना लगाने का भी नियम है। बिल में कहा गया है कि या तो जेल और जुर्माना दोनों लगाया जा सकता है। इसलिए, भविष्य में वंदे मातरम का अपमान करने वालों पर इस कानून के तहत दबाव डाला जाएगा।
इन सज़ाओं को और सख़्त किया गया है। देशभक्ति और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान का मुद्दा लगातार भारतीय जनता पार्टी के एजेंडे में रहा है। इसी के मुताबिक, इस बिल को और सख़्त बनाने की कोशिश की जा रही है। यह बिल आज, शुक्रवार को राज्यसभा में पेश किया गया। उस समय विपक्ष धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग कर रहा था। इस वजह से राज्यसभा में हंगामा हो गया। इसी हंगामे में यह बिल पेश किया गया। इसके अलावा, इसे वॉयस वोट से मंज़ूरी भी मिल गई। हंगामे की वजह से इस पर चर्चा नहीं हो सकी।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के लिए विपक्ष आक्रामक है। इस वजह से मॉनसून सेशन का पहला हफ़्ता बिना काम के बर्बाद हो गया। कांग्रेस अपनी मांग पर अड़ी हुई है। उसने यह स्टैंड लिया है कि प्रधान के इस्तीफ़े के बिना कोई चर्चा नहीं होगी। इसके अलावा, सड़कों पर CJP का आंदोलन तेज़ हो गया है। इस वजह से सरकार दोनों तरफ़ से दुविधा में है। ऐसे में सरकार ने हंगामे के बावजूद इस ज़रूरी बिल को मंज़ूरी दे दी है।
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