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Saturday, February 21, 2026
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“वक्फ कानून मजहब का नहीं, मुल्क का कानून है”

नकवी के ये बयानों से साफ है कि भाजपा वक्फ कानून को लेकर चल रही बहस को केवल धार्मिक नजरिए से नहीं देखना चाहती, बल्कि इसे संवैधानिक और प्रशासनिक सुधार की दिशा में उठाया गया कदम मानती है।

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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने वक्फ कानून को लेकर चल रहे विरोधों पर तीखा तंज कसते हुए स्पष्ट किया है कि यह कानून किसी धर्म का नहीं, बल्कि संविधान का हिस्सा है। शुक्रवार को जारी एक वीडियो बयान में नकवी ने वक्फ कानून की आलोचना करने वालों पर तीखे शब्दों में निशाना साधा और इसे “लूट की लंपट लामियों की लामबंदी” करार दिया।

नकवी ने कहा कि कुछ तत्व वक्फ संपत्तियों पर अपनी मनमानी बनाए रखने के लिए वैधानिक छूट की मांग कर रहे हैं, जबकि यह कानून किसी एक मजहब का नहीं है। “अगर हम संविधान के कानूनों में भी मजहबी चश्मे से एंट्री और नो एंट्री के बोर्ड लगाने लगेंगे, तो यह समाज के लिए खतरे की घंटी होगा,” उन्होंने चेतावनी दी। उनके मुताबिक, ऐसे रवैये से न सिर्फ संविधान की मूल भावना को ठेस पहुंचती है, बल्कि यह सामाजिक विभाजन और टकराव को भी बढ़ावा देता है।

भाजपा नेता ने यह भी कहा कि संशोधित वक्फ कानून का मकसद धार्मिक आस्था की रक्षा के साथ-साथ प्रशासनिक पारदर्शिता को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा, “यह कानून धार्मिक नहीं, बल्कि राष्ट्रहित से जुड़ा हुआ है। इसे मजहबी रंग देना अनुचित और भ्रामक है।”

मुख्तार अब्बास नकवी ने इसके साथ ही अपने पहले के बयानों को दोहराते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और कांग्रेस पार्टी पर भी निशाना साधा। उन्होंने ममता सरकार पर आरोप लगाया कि वह राज्य में सांप्रदायिक हिंसा की अनदेखी कर रही है और ‘क्रिमिनल-कम्युनल’ तत्वों की कठपुतली बन गई है।

कांग्रेस पर हमलावर होते हुए नकवी ने नेशनल हेराल्ड मामले में ईडी द्वारा दायर चार्जशीट के बाद पार्टी द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शन पर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “कांग्रेस अपने भ्रष्टाचार की कहानी को ‘क्रांति का ताबूत’ बनाकर पेश करने की कोशिश कर रही है। यह कोई राजनीतिक प्रतिशोध नहीं, बल्कि कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है जिसे अदालत ने भी संज्ञान में लिया है।”

नकवी के ये बयानों से साफ है कि भाजपा वक्फ कानून को लेकर चल रही बहस को केवल धार्मिक नजरिए से नहीं देखना चाहती, बल्कि इसे संवैधानिक और प्रशासनिक सुधार की दिशा में उठाया गया कदम मानती है। वहीं, विपक्षी दलों के लिए यह बयान राजनीतिक जवाबी हमला भी है, जो वक्फ और उससे जुड़ी नीतियों को लेकर केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं।

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