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Wednesday, October 21, 2026
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: भाजपा के ‘भरोसा पत्र’ में महिलाओं को ₹3000 और 6 महीने में UCC का वादा

अमित शाह ने ममता सरकार पर साधा निशाना, कहा—15 साल ‘अंधकार का काल’

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) का चुनावी घोषणापत्र ‘भरोसा पत्र’ जारी किया। इसमें महिलाओं को हर महीने ₹3000 की आर्थिक सहायता और सत्ता में आने के छह महीने के भीतर समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने का बड़ा वादा किया गया है। घोषणापत्र जारी करते हुए शाह ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के 15 साल के शासन को “अंधकार का काल” बताया और दावा किया कि राज्य में लोग भय और निराशा के माहौल में जी रहे हैं।

भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में वादा किया है कि सरकार बनने पर राज्य की हर महिला के बैंक खाते में हर महीने ₹3000 की राशि 1 से 5 तारीख के बीच ट्रांसफर की जाएगी। शाह ने कहा कि यह कदम महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और परिवारों की वित्तीय स्थिति मजबूत करने के लिए उठाया जाएगा।

घोषणापत्र में सबसे अहम वादा समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर किया गया है। शाह ने कहा कि अगर भाजपा सत्ता में आती है, तो छह महीने के भीतर UCC लागू किया जाएगा। भाजपा ने अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाने का भी ऐलान किया। शाह ने कहा, “डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट हमारी नीति होगी जब हम सरकार बनाएंगे।” घोषणापत्र में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए भी कई अहम घोषणाएं की गईं, सभी को महंगाई भत्ता (DA) सुनिश्चित किया जाएगा। 45 दिनों के भीतर 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होंगी।

शाह ने कहा कि राज्य में भाजपा की सरकार बनने पर केंद्र की प्रमुख योजनाओं, जैसे आयुष्मान भारत, को पूरी तरह लागू किया जाएगा, ताकि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। अमित शाह ने घोषणापत्र को “भरोसे का संकल्प” बताते हुए कहा कि यह दस्तावेज राज्य के हर वर्ग को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है और इसका उद्देश्य बंगाल में भरोसा बहाल करना है।

उन्होंने कहा कि यह संकल्प पत्र किसानों, महिलाओं और युवाओं को नई दिशा देगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के विजन को आगे बढ़ाएगा। BJP ने अपने विजन में बंगाल की सांस्कृतिक पहचान को पुनर्जीवित करने और ऐसा राज्य बनाने का लक्ष्य रखा है, जहां लोग “बिना डर और गर्व के साथ” जीवन जी सकें।

शाह ने बंगाली नववर्ष ‘पोइला बैशाख’ (15 अप्रैल) से लेकर रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती (9 मई) तक के समय को एक प्रतीकात्मक अवधि बताते हुए राज्य के “खोए गौरव” को वापस लाने की बात कही। भाजपा के इस घोषणापत्र के साथ ही पश्चिम बंगाल में चुनावी मुकाबला और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। अब देखना होगा कि इन वादों पर जनता की क्या प्रतिक्रिया होती है और राज्य की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।

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