प्रशासन के आदेश के बाद दुकानदारों ने अपनी दुकानें खाली करनी शुरू कर दीं और सामान दूसरी जगह पहुंचाया। सभी दुकानें खाली कराने के बाद बाजार को सील कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान मौके पर पुलिस बल की तैनाती की गई है, ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
जानकारी के अनुसार, इस बाजार की देखरेख मौलाना तौकीर रजा की पार्टी आईएमसी के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. नफीस करते हैं। दंगों से पहले डॉ. नफीस ने पुलिस को धमकी दी थी कि वे उनके हाथ काट देंगे और वर्दी उतार देंगे। अधिकारियों का दावा है कि यह बाजार अवैध निर्माण है और इसी कारण प्रशासन इसे ध्वस्त करने की कार्रवाई कर रहा है।
इस बाजार से हर महीने लाखों रुपये का किराया वसूला जाता था। सामने की दुकानों का किराया 10 से 12 हजार रुपये और अंदर की दुकानों का किराया 5 से 7 हजार रुपये तय था। अनुमान है कि इस पूरी इमारत की कीमत 30 करोड़ रुपये से ज्यादा है।
इस बीच बरेली में 30 सितंबर तक इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं। कई दुकानदारों ने दावा किया है कि उनके पास हाई कोर्ट का स्टे ऑर्डर है, लेकिन अधिकारी उसकी परवाह नहीं कर रहे। फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई से मौलाना तौकीर रजा को बड़ा झटका लगा है।
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