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मध्य प्रदेश: ‘ब्राह्मण बेटियों’ वाली टिप्पणी को लेकर IAS संतोष वर्मा को नोटिस

7 दिन में जवाब नहीं तो कार्रवाई

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मध्य प्रदेश सरकार ने वरिष्ठ IAS अधिकारी संतोष वर्मा को उनके विवादित बयान को लेकर कड़ा शो-कॉज नोटिस जारी किया है। वर्मा जो SC/ST कर्मचारियों के संगठन AJAKS की राज्य इकाई के अध्यक्ष ने हाल ही में एक सम्मेलन में आरक्षण बहस को ब्राह्मण समुदाय की बेटियों से जोड़ते हुए टिप्पणी की थी, जिसके बाद पूरे प्रदेश में भारी विरोध भड़का।

बुधवार (26 नवंबर) देर रात जारी नोटिस में सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने कहा कि वर्मा की टिप्पणी एक IAS अधिकारी से अपेक्षित गरिमा, निष्पक्षता और अनुशासन के बिल्कुल विपरीत है। सरकार ने इसे मनमाना व्यवहार, अनुशासनहीनता, और गंभीर कदाचार बताते हुए All India Services (Conduct) Rules, 1967 के उल्लंघन का मामला बताया है।

सरकार ने चेतावनी दी है कि उनके खिलाफ All India Services (Discipline and Appeal) Rules, 1969 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जा सकती है। वर्मा को 7 दिनों में विस्तृत जवाब देना होगा, अन्यथा बिना किसी अतिरिक्त नोटिस के कार्रवाई आगे बढ़ेगी।

23 नवंबर को भोपाल में AJAKS सम्मेलन के दौरान वर्मा के बयान का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वह कहते दिखे, “जब तक कोई ब्राह्मण अपनी बेटी मेरे बेटे को न दे दे या उससे रिश्ता न कर ले, तब तक एक परिवार में केवल एक ही व्यक्ति को आरक्षण मिलना चाहिए।” इस बयान ने सामाजिक और राजनीतिक हलकों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया।

मंत्रालय अधिकारी-कर्मचारी संघ ने उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला को ज्ञापन सौंपकर वर्मा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। संघ अध्यक्ष सुधीर नायक ने बयान को अत्यंत आपत्तिजनक और सामाजिक सौहार्द को चोट पहुंचाने वाला बताया।

BJP नेता और पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव ने वर्मा को “चरित्रहीन” बताते हुए आरोप लगाया कि ऐसे व्यक्ति को कभी IAS  बनने ही नहीं देना चाहिए था। उन्होंने पुराने मामले उठाए और कहा कि, वर्मा पर जज की फर्जी हस्ताक्षर करने का आरोप रहा है, उनका पूरा सर्विस रिकॉर्ड जांचा जाना चाहिए, और वह मामले को मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के सामने रखेंगे।

वहीं, कांग्रेस ने भी सरकार पर दबाव बढ़ा दिया। उपनेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज कर तत्काल गिरफ्तारी की मांग करते हुए कहा कि अधिकारी समाज को बांटने का काम कर रहा है।

विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों से घिरने के बाद IAS वर्मा ने सार्वजनिक माफी जारी की। उन्होंने दावा किया कि, 27 मिनट के भाषण में से केवल 2 सेकंड की क्लिप वायरल की गई, उनके बयान को तोड़ा-मरोड़ा गया है और संदर्भ से बाहर पेश किया गया है।

2012 बैच के IAS वर्मा, जो अभी कृषि विभाग में उप सचिव हैं, पहले राज्य प्रशासनिक सेवा में रहे हैं। उनके खिलाफ पहले भी गंभीर आरोप लग चुके हैं। इंदौर में न्यायिक दस्तावेजों की जालसाजी, महिला शिकायतकर्ताओं द्वारा शादी का झांसा, धोखा और धमकी देने के आरोप और कई आपराधिक मामलों में गिरफ्तारी। इन पुराने मामलों ने भी इस नए विवाद को और संवेदनशील बना दिया है।

विधानसभा सत्र से पहले उठे इस विवाद ने प्रशासनिक हलकों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक में हलचल बढ़ा दी है। सरकार, विपक्ष, अधिकारी संगठन सभी की निगाहें अब वर्मा के जवाब और आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।

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