आज से राम मंदिर के शिखर को स्वर्ण जड़ित करने का काम होगा शुरू

मिश्रा ने यह भी बताया कि राम मंदिर निर्माण से संबंधित कार्यों की व्यापक समीक्षा की जा रही है।

आज से राम मंदिर के शिखर को स्वर्ण जड़ित करने का काम होगा शुरू

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अयोध्या में निर्माणाधीन श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखरों को अब स्वर्ण जड़ित किया जाएगा। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने शुक्रवार (23 मई) को इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि मंदिर के सभी शिखरों पर सोने की परत चढ़ाने की प्रक्रिया आज से शुरू की जा रही है और अगले दो-तीन दिनों में यह कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

मीडिया से बातचीत में नृपेंद्र मिश्रा ने बताया कि “हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि यह कार्य पूरी तरह तय प्रक्रिया और सुरक्षा मानकों के तहत हो। जिन विशेषज्ञों को यह कार्य सौंपा गया है, वे अयोध्या पहुंच चुके हैं और आज से स्वर्ण परत चढ़ाने की शुरुआत हो जाएगी।”

मिश्रा ने यह भी बताया कि राम मंदिर निर्माण से संबंधित कार्यों की व्यापक समीक्षा की जा रही है। उन्होंने कहा, “हमने मुख्य रूप से मंदिर के द्वार, सभा गृह और अतिथि गृह की प्रगति की समीक्षा की है। मंदिर का पहला द्वार 30 जून तक बनकर तैयार हो जाएगा। पहले मई तक इसे पूरा करने की योजना थी, लेकिन कुछ तकनीकी कारणों से इसे दोबारा बनवाया जा रहा है।”

उन्होंने यह भी कहा कि अगस्त तक द्वार संख्या 11 का निर्माण पूरा होगा और इसके बाद द्वार संख्या 3 पर काम शुरू किया जाएगा।

नृपेंद्र मिश्रा ने खुलासा किया कि भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता की मूर्तियां आज अयोध्या पहुंच जाएंगी और इन्हें मंदिर के प्रथम तल पर स्थापित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसके लिए पूरी पूर्व नियोजित योजना तैयार कर ली गई है और उसी के अनुसार काम आगे बढ़ रहा है।

राम मंदिर निर्माण से जुड़े धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत 3 जून से होगी और 5 जून को समाप्त होगी। इसके साथ ही मंदिर का मुख्य निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा और रखरखाव कार्य शुरू होगा। मिश्रा ने बताया कि मंदिर के शेष परिसर का कार्य सितंबर-अक्टूबर तक पूरा हो जाने की संभावना है।

उन्होंने यह भी बताया कि मंदिर परिसर में बने सप्त मंदिर का निर्माण पूरा हो चुका है और यहां ऋषि-मुनियों की मूर्तियां स्थापित की जाएंगी। इस तरह राम मंदिर परिसर धीरे-धीरे अपने पूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक स्वरूप की ओर अग्रसर हो रहा है।

राम मंदिर निर्माण का यह चरण न केवल आस्था और भव्यता का प्रतीक बन रहा है, बल्कि राष्ट्रीय गौरव और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में भी एक ऐतिहासिक कदम साबित हो रहा है।

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