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भारत का विदेशी मुद्रा भंडार भरा खचाखच, लगातार पांचवें सप्ताह में वृद्धि दर्ज!

सोने का भंडार (Gold Reserves) भी 1.5 बिलियन डॉलर बढ़कर 79.36 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया।

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भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर एक अच्छी खबर सामने आई है, फिर एक बार भारत का विदेश मुद्रा भंडार खचाखच भर रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, 4 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 10.8 बिलियन डॉलर की भारी बढ़ोतरी के साथ 676.3 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। यह लगातार पांचवां सप्ताह है जब भारत के फॉरेक्स रिज़र्व में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

RBI की साप्ताहिक सांख्यिकीय रिपोर्ट के अनुसार, देश के फॉरेक्स रिजर्व में सबसे बड़ा योगदान विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (Foreign Currency Assets) का रहा, जो 9 बिलियन डॉलर बढ़कर 574.08 बिलियन डॉलर हो गईं। वहीं, सोने का भंडार (Gold Reserves) भी 1.5 बिलियन डॉलर बढ़कर 79.36 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया। इसके अतिरिक्त, विशेष आहरण अधिकार (SDRs) भी 186 मिलियन डॉलर की वृद्धि के साथ 18.36 बिलियन डॉलर पर दर्ज किए गए।

28 मार्च को समाप्त सप्ताह में भी भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 6.6 बिलियन डॉलर की बढ़त के साथ 665.4 बिलियन डॉलर पर पहुंचा था, जो पांच महीने का उच्चतम स्तर था। रुपये में अस्थिरता को कम करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल के हफ्तों में रुपया-डॉलर बाजार में हस्तक्षेप और पुनर्मूल्यांकन जैसे कदम उठाए, जिनका असर अब विदेशी मुद्रा भंडार में साफ़ दिखाई दे रहा है।

सितंबर 2024 में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 704.885 बिलियन डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंचा था। यह आंकड़ा भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थायित्व, लचीलापन और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच उसकी ताकत को दर्शाता है।

मजबूत फॉरेक्स रिजर्व न केवल रुपये को समर्थन देने में मदद करते हैं, बल्कि आरबीआई को जरूरत पड़ने पर स्पॉट और फॉरवर्ड करेंसी मार्केट में हस्तक्षेप करने की अधिक गुंजाइश भी देते हैं। इसके विपरीत, घटते भंडार की स्थिति में केंद्रीय बैंक के पास हस्तक्षेप की गुंजाइश सीमित हो जाती है।

इस बीच, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के लेटेस्ट आंकड़ों के अनुसार, भारत का व्यापारिक व्यापार घाटा फरवरी 2025 में घटकर 14.05 बिलियन डॉलर रह गया, जो कि तीन वर्षों में सबसे निचला स्तर है। जनवरी में यह आंकड़ा 22.99 बिलियन डॉलर था।

फरवरी महीने में निर्यात स्थिर रहा जबकि आयात में गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि भू-राजनीतिक तनावों और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत का बाहरी क्षेत्र (External Sector) मजबूती के साथ टिका हुआ है। भारत का लगातार बढ़ता विदेशी मुद्रा भंडार आर्थिक आत्मविश्वास का संकेत है और यह स्पष्ट करता है कि मंदी के वैश्विक दौर में भी भारत की स्थिति सशक्त बनी हुई है।

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