30 C
Mumbai
Sunday, March 1, 2026
होमवीडियो गैलरीविविधाINS अरिधमन के नौसेना में शामिल होने से भारत की परमाणु प्रतिरोधक...

INS अरिधमन के नौसेना में शामिल होने से भारत की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को मजबूती

तीन SSBN का मील का पत्थर करीब

Google News Follow

Related

भारत की समुद्री रणनीतिक क्षमताओं को बड़ा बल मिलने जा रहा है। स्वदेशी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी INS Aridhaman (S4) के कमीशनिंग की तैयारी अंतिम चरण में है। इसके शामिल होते ही भारत पहली बार तीन सक्रिय अरिहंत-श्रेणी की SSBN (न्यूक्लियर बैलिस्टिक मिसाइल सबमरीन) के साथ समुद्र-आधारित परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को नए स्तर पर ले जाएगा।

परियोजना से जुड़े सूत्रों के अनुसार पनडुब्बी अपने अंतिम समुद्री परीक्षणों से गुजर रही है और इसका औपचारिक कमीशनिंग अप्रैल–मई के बीच संभावित है। पिछले वर्ष दिसंबर में नौसेना प्रमुख एडमिरल डी.के. त्रिपाठी ने पुष्टि की थी कि INS अरिधमन 2026 में सेवा में प्रवेश करेगी। यह पनडुब्बी गुप्त ‘एडवांस्ड टेक्नोलॉजी वेसल’ (ATV) परियोजना के तहत विशाखापत्तनम स्थित शिप बिल्डिंग सेंटर में निर्मित की गई है।

करीब 7,000 टन वजनी INS अरिधमन, 6,000 टन की INS Arihant और INS Arighaat की तुलना में बड़ी है। अतिरिक्त आकार के कारण इसमें अधिक हथियार क्षमता और लंबी समुद्री तैनाती की क्षमता है। पनडुब्बी में 750 किमी रेंज वाली 24, K-15 ‘सागरिका’ सबमरीन-लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइलों के ले जाने की क्षमता होगी। साथ ही 3,500 किमी रेंज वाली K-4 मिसाइलें भी तैनात की जा सकेंगी। K-4 की विस्तारित मारक क्षमता भारत को व्यापक क्षेत्र में ‘सेकंड स्ट्राइक’ विकल्प प्रदान करती है।

INS अरिधमन के शामिल होने के बाद रणनीतिक बल कमान (SFC) के तहत तीन सक्रिय SSBN- अरिहंत, अरिघात और अरिधमन तैनात रहेंगे। इससे भारत ‘Continuous At-Sea Deterrence’ (CASD) सिद्धांत के और करीब पहुंच जाएगा, जिसके तहत वर्ष के 365 दिन कम से कम एक SSBN समुद्र में गश्त पर रहेगी।

यह क्षमता किसी संभावित प्रथम-प्रहार की स्थिति में विश्वसनीय प्रतिकार सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। भारत समानांतर रूप से पनडुब्बी बेड़े को बहु-स्तरीय बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। रूस से अकुला-श्रेणी की परमाणु हमलावर पनडुब्बी (चक्रा-III) की लीज पर वार्ता जारी है, जिसकी डिलीवरी 2027-28 के आसपास संभावित है।

इसके अलावा जर्मनी के साथ 8-10 अरब डॉलर के प्रोजेक्ट-75(I) समझौते को अंतिम रूप दिया जा रहा है, जिसके तहत एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक वाली छह उन्नत डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां शामिल होंगी।

यह आधुनिकीकरण ऐसे समय हो रहा है जब पाकिस्तान चीन की मदद से हंगोर-श्रेणी की आठ डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां शामिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अरब सागर और हिंद महासागर क्षेत्र में बदलते सामरिक संतुलन के बीच भारत अपनी समुद्री बढ़त बनाए रखने के लिए क्षमताएं बढ़ा रहा है।

ATV परियोजना के तहत स्वदेशी परमाणु रिएक्टर और उन्नत हुल तकनीक विकसित करना भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। भविष्य की परियोजनाओं—जैसे S4* और प्रोजेक्ट P-75 अल्फा—में लंबी दूरी की K-5 मिसाइलों के एकीकरण की योजना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि INS अरिधमन का कमीशनिंग भारत की ‘नो-फर्स्ट-यूज’ नीति के अनुरूप विश्वसनीय प्रतिशोध क्षमता को मजबूत करेगा। साथ ही, हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री संचार लाइनों की सुरक्षा और व्यापक भू-राजनीतिक संतुलन में भारत की स्थिति को सुदृढ़ करेगा। INS अरिधमन के सेवा में आने के साथ भारत की समुद्र-आधारित परमाणु प्रतिरोधक क्षमता एक नए चरण में प्रवेश करने जा रही है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य में महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है।

यह भी पढ़ें:

 

 

Indian Railways: ट्रेन यात्रा को हाई-टेक सुरक्षा कवच: 400 स्टेशनों पर बनेंगे डिजिटल थाने

कर्नाटक और हैदराबाद में शिवाजी महाराज की जयंती कार्यक्रमों पर हमलें; तीन राज्यों में सांप्रदायिक तनाव

‘बोर्ड ऑफ पीस’ बैठक में ट्रंप ने शहबाज शरीफ कुछ यूं किया खड़ा की वीडिओ हुआ वायरल

National Stock Exchange

लेखक से अधिक

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

The reCAPTCHA verification period has expired. Please reload the page.

Star Housing Finance Limited

हमें फॉलो करें

151,087फैंसलाइक करें
526फॉलोवरफॉलो करें
296,000सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

अन्य लेटेस्ट खबरें