शिवराज बस्ती में हाल ही में लगे ‘मकान बिकाऊ है’ पोस्टरों ने इलाके में हलचल मचा दी है। स्थानीय निवासी कुछ अनजान और अवैध घुसपैठियों से परेशान हैं, जिन्हें कुछ लोग रोहिंग्या या बांग्लादेशी बता रहे हैं। वहीं पुलिस का कहना है कि यहां रहने वाले लोग महाराष्ट्र के गोंदिया जिले के खानाबदोश हैं और अपनी मर्जी से बस्ती में रह रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, शिवराज बस्ती में पिछले कुछ समय से लगभग 50 लोग रह रहे हैं। इनमें से कुछ लोग झोपड़ियों में रहते हैं और कुछ किराए पर कमरे लेते हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि ये लोग भीख माँगते हैं, गंदगी फैलाते हैं और उपद्रव करते हैं। विरोध करने पर कुछ ने गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार किया। इसी कारण कई परिवार अपने घर छोड़कर चले गए और घरों के बाहर ‘मकान बेचने के लिए’ पोस्टर लगा दिए। यह घटना 5 सितंबर 2025 के आसपास की बताई जा रही है।
घुसपैठियों को लेकर शिवराज बस्ती के लोग दो गुटों में बंट गए हैं। एक गुट इन्हें हटाना चाहता है और मानता है कि ये लोग बांग्लादेशी या रोहिंग्या हैं। वहीं, कुछ लोग जो इन्हें किराए पर रखते हैं, उनका कहना है कि ये लोग अपने पैरों पर खड़े हैं और कोई परेशानी नहीं पैदा करते।
पोस्टरों की सूचना मिलने पर कुछ हिंदूवादी संगठनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। जांच में पता चला कि बस्ती में रहने वाले लोग खानाबदोश हैं और महाराष्ट्र के गोंदिया जिले से आए हैं। पुलिस ने कहा कि ये लोग कहीं से भगाए नहीं गए, बल्कि अपनी इच्छा से यहाँ रह रहे हैं। बस्ती की एक महिला ने बताया कि वर्षों से यहाँ रह रही हैं, लेकिन अब उन्हें और अन्य लोगों को चोरी करने वाला और गंदगी फैलाने वाला बताया जा रहा है।
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