अमेरिका कथित तौर पर ईरान की जब्त की गई (फ्रीज) संपत्तियों का उपयोग खाड़ी देशों में युद्ध से हुए नुकसान के पुनर्निर्माण के लिए करने पर विचार कर रहा है। CBS न्यूज की एक रिपोर्ट में किया गया है, जिसमें अमेरिकी वित्त विभाग से जुड़े सूत्रों के हवाले से कई अहम जानकारियां सामने आई हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग उन सभी कानूनी विकल्पों की समीक्षा कर रहा है, जिनके जरिए ईरान की फ्रीज संपत्तियों को खाड़ी देशों के बुनियादी ढांचे की मरम्मत और पुनर्निर्माण में लगाया जा सके। माना जा रहा है कि यह कदम ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच उठाया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे खाड़ी देशों से उन परियोजनाओं और ढांचागत नुकसान का विस्तृत वित्तीय आकलन प्राप्त करें, जो हाल के संघर्षों के दौरान प्रभावित हुए हैं।
इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियां, जैसे बैंक खातों में जमा राशि या तेल टैंकरों जैसी संपत्तियों को कानूनी रूप से पुनर्निर्माण कार्यों में इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं।
यह प्रस्ताव ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष शांति वार्ताएं चल रही हैं, लेकिन वे अब तक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंची हैं। ईरान का कहना है कि किसी भी समझौते में उसकी फ्रीज की गई अरबों डॉलर की संपत्तियों को जारी करना अनिवार्य होना चाहिए।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हाल के महीनों में ईरान ने सऊदी अरब, यूएई, कुवैत, बहरीन, कतर और ओमान जैसे देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है।
सूत्रों के अनुसार, हाल ही में अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास ईरानी रडार ठिकानों पर कार्रवाई की, जिसके जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले किए। हालांकि कई मिसाइलों को हवा में ही रोक लिया गया, लेकिन कुछ क्षेत्रों में नुकसान की भी सूचना है।
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया कि उसके हमलों ने अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया, जबकि अमेरिकी पक्ष ने कहा कि अधिकांश मिसाइलें इंटरसेप्ट कर ली गईं।
ईरान का कहना है कि लगभग 24 अरब डॉलर की फ्रीज संपत्तियों को किसी भी शांति समझौते में शामिल किया जाना चाहिए। वहीं अमेरिका का रुख है कि इन संपत्तियों का उपयोग क्षेत्रीय सुरक्षा और पुनर्निर्माण के लिए किया जा सकता है, जिससे सहयोगी देशों को राहत मिले।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच पाकिस्तान और अन्य क्षेत्रीय देशों की ओर से कूटनीतिक प्रयास भी किए जा रहे हैं, ताकि तनाव को कम किया जा सके। हालांकि लेबनान जैसे क्षेत्रों में जारी संघर्ष और इज़रायल-हिज़बुल्लाह तनाव ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह विवादित प्रस्ताव न केवल ईरान-अमेरिका संबंधों को प्रभावित करेगा, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया में शक्ति संतुलन और कूटनीतिक समीकरणों को भी नई दिशा दे सकता है।
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