करीब 60 देशों को कवर करने वाली इस रिपोर्ट में बताया गया कि पिछले दो दशकों में भारत की वास्तविक प्रति व्यक्ति वित्तीय संपत्ति पांच गुना बढ़ी है, जो किसी भी अन्य उभरती अर्थव्यवस्था के मुकाबले सबसे अच्छा प्रदर्शन है।
भारतीय परिवारों के पोर्टफोलिया का 54 प्रतिशत हिस्सा बैंक डिपॉजिट से आता है। ऐसे में इसमें वृद्धि बढ़ती बचत को दिखाती है।
रिपोर्ट में कहा गया, “वास्तविक रूप से मुद्रास्फीति के बाद फाइनेंशियल एसेट्स में 9.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिससे क्रय शक्ति महामारी-पूर्व स्तर से 40 प्रतिशत ऊपर पहुंच गई है।
भारत की प्रति व्यक्ति नेट फाइनेंशियल एसेट्स 15.6 प्रतिशत बढ़कर 2,818 डॉलर पर पहुंच गई है। वहीं, देनदारी की वृद्धि दर 12.1 प्रतिशत रही, जिससे परिवारों पर कर्ज जीडीपी का 41 प्रतिशत रहा।
2024 में अमेरिका ने ग्लोबल फाइनेंशियल एसेट्स वृद्धि का आधा हिस्सा हासिल किया। पिछले दशक में अमेरिकी परिवारों ने दुनिया भर में 47 प्रतिशत संपत्ति वृद्धि उत्पन्न की है, जबकि चीन में यह 20 प्रतिशत और पश्चिमी यूरोप में 12 प्रतिशत है।
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