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बिहार में भाजपा ने बागियों पर शिकंजा कसा, पूर्व केंद्रीय मंत्री समेत दो अन्य को पार्टी से निकाला!

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बिहार में बगावत पर कड़ा रुख अपनाते हुए भारतीय जनता पार्टी ने सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और आरा के पूर्व सांसद आर.के. सिंह को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में छह वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया गया है। पार्टी ने यह कदम बिहार में चुनाव के बाद उभरे असंतोष को नियंत्रित करने और संगठनात्मक अनुशासन को मजबूत करने के प्रयास के तहत उठाया है। इसी कार्रवाई के तहत भाजपा ने एमएलसी अशोक कुमार अग्रवाल और कटिहार की मेयर उषा अग्रवाल को भी निलंबित कर दिया है। आर.के. सिंह को एक सप्ताह के भीतर औपचारिक स्पष्टीकरण देने के लिए कहा गया है।

दिन में पहले जारी किए गए नोटिस में भाजपा ने सिंह पर सार्वजनिक बयानबाज़ी और आचरण से पार्टी को नुकसान पहुँचाने का आरोप लगाया था। नोटिस में कहा गया कि वे लगातार पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहे हैं, इसलिए उन्हें निलंबित किया जा रहा है और उनसे पूछा गया कि उन्हें निष्कासित क्यों न किया जाए। कुछ घंटों के भीतर ही पार्टी ने उनकी प्राथमिक सदस्यता समाप्त करने का औपचारिक ऐलान कर दिया, जो हाल के वर्षों में भाजपा की सबसे कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है।

बिहार एनडीए के भीतर तनाव तब और बढ़ गया था जब आर.के. सिंह ने आदानी ग्रुप से जुड़े एक कथित बड़े बिजली परियोजना घोटाले का आरोप लगाया। सिंह, जो 2017 से 2024 तक केंद्रीय ऊर्जा मंत्री रहे, ने भागलपुर (पीरपैंती) की 2,400 मेगावाट बिजली परियोजना को अदानी पावर लिमिटेड को दिए जाने पर गंभीर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि यह 60,000–62,000 करोड़ रुपये का घोटाला है और राज्य सरकार गरीबों-मध्यम वर्ग पर बोझ डालते हुए 6 रुपये प्रति यूनिट की ऊँची दर पर बिजली खरीदने की तैयारी कर रही है। उनके आरोपों ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया और कांग्रेस तथा वाम दलों ने भी इस मुद्दे को उठाकर एनडीए सरकार पर निशाना साधा।

सिंह की लगातार की जा रही आलोचना से पार्टी के साथ उनकी दूरी और बढ़ती गई। उन्होंने खुलकर कहा था कि मतदाता किसी भी आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवार को वोट न दें, चाहे वह एनडीए का ही प्रत्याशी क्यों न हो। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि कोई योग्य उम्मीदवार न मिले तो लोग NOTA का इस्तेमाल करें। हाल ही में उन्होंने सोशल मीडिया पर 62,000 करोड़ रुपये के कथित घोटाले से जुड़े दस्तावेज भी साझा किए और चुनाव आयोग पर भी निशाना साधते हुए उसे मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू करने में असफल बताया। उन्होंने चुनाव के दौरान बड़े हथियारबंद काफिलों की आवाजाही को लोकतांत्रिक मानकों का उल्लंघन बताया और अधिकारियों व प्रभावशाली उम्मीदवारों पर कार्रवाई की मांग की थी। 2024 के लोकसभा चुनाव में अपनी सीट हार चुके आर.के. सिंह की यह बगावती भूमिका पार्टी के लिए लगातार चुनौती बनती जा रही थी।

इसी क्रम में भाजपा ने एमएलसी अशोक कुमार अग्रवाल को भी निलंबित कर दिया, जिन्होंने बिहार चुनाव में अपने बेटे सौरव अग्रवाल के लिए प्रचार किया था। सौरव ने वीआईपी उम्मीदवार के रूप में भाजपा प्रत्याशी तर किशोर प्रसाद के खिलाफ चुनाव लड़ा था। पार्टी ने इसे स्पष्ट रूप से अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधि माना।

कटिहार की मेयर उषा अग्रवाल पर भी इसी तरह की आरोपों के चलते कार्रवाई की गई। उन्हें भी पार्टी ने निलंबित कर दिया है। इन तीनों नेताओं के खिलाफ की गई सख्त कार्रवाई से स्पष्ट है कि भाजपा बिहार में किसी भी प्रकार की बगावत या आंतरिक असंतोष को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

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