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Monday, February 23, 2026
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इजरायल में अटॉर्नी जनरल ऑफिस बोला, नेतन्याहू माफीनामा जांच लंबित अभी नहीं!

नेतन्याहू ने नवंबर 2025 में राष्ट्रपति इसाक हर्जोग से औपचारिक रूप से माफी की मांग की थी। उन्होंने धोखाधड़ी, रिश्वतखोरी और विश्वासघात के आरोपों से मुक्त करने की बात लिखी थी| 

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इजरायल की अटॉर्नी जनरल गली बहाराव-मियारा ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के भ्रष्टाचार मामलों में माफी के अनुरोध की अभी तक जांच नहीं की है। ऐसा अटॉर्नी जनरल ऑफिस के हवाले से स्थानीय मीडिया ने बताया है।

द टाइम्स ऑफ इजरायल के मुताबिक यह बयान शुक्रवार को चैनल 13 की एक रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें दावा किया गया था कि अटॉर्नी जनरल जल्द ही अपनी राय पेश करेंगी और अनुरोध को खारिज करने की सिफारिश कर सकती हैं। ऑफिस ने कहा कि क्षमा याचना की जांच मानक प्रक्रियाओं के अनुसार की जाएगी।

नेतन्याहू ने नवंबर 2025 में राष्ट्रपति इसाक हर्जोग से औपचारिक रूप से माफी की मांग की थी। उन्होंने धोखाधड़ी, रिश्वतखोरी और विश्वासघात के आरोपों से मुक्त करने की बात लिखी थी, लेकिन अपना अपराध स्वीकार नहीं किया था। यह अनुरोध उनके लंबे समय से चल रहे भ्रष्टाचार ट्रायल को समाप्त करने का प्रयास था।

तय प्रक्रिया के तहत अटॉर्नी जनरल की राय क्षमा विभाग को भेजी जाएगी, जो राष्ट्रपति को अपनी सिफारिश देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अनुरोध के लिए दोष स्वीकारना जरूरी नहीं है, लेकिन पूर्व-दोषसिद्धि माफी दुर्लभ मामलों में ही दी जाती है।

यह नया बयान इजरायल की राजनीति में नए विवाद को जन्म दे सकता है, जहां नेतन्याहू पहले से ही कई जांचों का सामना कर रहे हैं। राष्ट्रपति हर्जोग ने कहा है कि वे सभी राय प्राप्त करने के बाद जिम्मेदारीपूर्वक निर्णय लेंगे।

पिछले हफ्ते, नेतन्याहू से मिलने के तुरंत बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हर्जोग को माफी न देने के लिए “खुद पर शर्म आनी चाहिए।”

पिछले साल ट्रंप ने हर्जोग को इस मुद्दे पर खत भी लिखा था। ट्रंप ने उन पर लगे आरोपों को राजनीति से प्रेरित और अनुचित बताया था।

पोलिटिको साइट को दिए साक्षात्कार में इजरायली राष्ट्रपति ने उस खत का जवाब दिया था। उन्होंने कहा कि हालांकि वह राष्ट्रपति ट्रंप के साथ अपनी दोस्ती को बहुत महत्व देते हैं, लेकिन इजरायल का लीगल सिस्टम स्वतंत्र रहना चाहिए और उसका पूरा सम्मान किया जाना चाहिए।

हर्जोग ने कहा, “इजरायल एक स्वायत्त देश है, और इसकी वैधानिक प्रक्रिया को बिना किसी बाहरी दखल के बनाए रखा जाना चाहिए।” उन्होंने आगे कहा कि हालांकि यह आग्रह बहुत खास था, लेकिन उनकी “पहली, दूसरी और तीसरी प्राथमिकता” इजरायल के लोगों की भलाई और ईमानदारी है।

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