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Friday, May 1, 2026
होमन्यूज़ अपडेटरूस से 5 और S-400 सिस्टम खरीदने को रक्षा मंत्रालय की मंजूरी

रूस से 5 और S-400 सिस्टम खरीदने को रक्षा मंत्रालय की मंजूरी

भारत की वायु सुरक्षा को मजबूती

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भारत ने अपनी वायु रक्षा क्षमता को और सशक्त बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने रूस से अतिरिक्त 5 S-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से देश की मिसाइल रोधी क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है, खासकर चीन और पाकिस्तान से उत्पन्न हो रहे सुरक्षा खतरों के बीच। ‘ट्रायम्फ’ सिस्टम के नाम से जाना जाने वाला S-400  दुनिया के सबसे उन्नत सतह से हवा में मार करने वाले रक्षा प्रणालियों में से एक है। यह 400 किलोमीटर से अधिक दूरी तक हवाई लक्ष्यों, जैसे फाइटर जेट, ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल को निशाना बनाने में सक्षम है।

भारत ने 2018 में रूस के साथ 5 S-400 स्क्वाड्रन खरीदने का लगभग 5.43 अरब डॉलर का समझौता किया था, जिसकी डिलीवरी 2021 से शुरू हो चुकी है। अब 5 अतिरिक्त यूनिट्स के शामिल होने से इनकी कुल संख्या 10 हो जाएगी, जिससे देश के उत्तरी सीमावर्ती क्षेत्रों और हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा कवरेज और मजबूत होगा। इन प्रणालियों की आपूर्ति रूस की सरकारी कंपनी रोसोबोरोनेक्सपोर्ट द्वारा की जाएगी और अगले कुछ वर्षों में चरणबद्ध तरीके से पूरी होने की संभावना है।

रक्षा अधिकारियों के अनुसार, यह खरीद ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के साथ संतुलन बनाए रखते हुए की जा रही है। स्वदेशी प्रणालियां जैसे आकाश-एनजी और प्रोजेक्ट कुशा विकसित हो रही हैं, लेकिन उनके पूरी तरह तैयार होने तक S-400 एक महत्वपूर्ण अंतरिम समाधान बना रहेगा।

S-400 सिस्टम एक साथ 300 तक लक्ष्यों को ट्रैक करने और विभिन्न दूरी पर उन्हें इंटरसेप्ट करने में सक्षम है। इसमें लंबी दूरी के लिए 40N6 मिसाइल और कम दूरी के लिए 9M96 मिसाइलों का उपयोग किया जाता है, जो इसे बहु-स्तरीय सुरक्षा कवच प्रदान करता है। इसे भारत की मौजूदा रक्षा प्रणालियों जैसे स्वदेशी रडार और MRSAM के साथ जोड़कर एक मजबूत नेटवर्क आधारित एयर डिफेंस ग्रिड तैयार किया जाएगा।

हालांकि अमेरिका के CAATSA प्रतिबंधों की आशंका और यूक्रेन युद्ध के चलते रूस पर वैश्विक दबाव बना हुआ है। इसके बावजूद भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग मजबूत बना हुआ है। भारत पहले भी S-400 को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक बताते हुए CAATSA से छूट हासिल कर चुका है, और इस बार भी इसी रुख को दोहराया जा सकता है।

चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर बढ़ते तनाव और हवाई गतिविधियों के मद्देनजर यह खरीद बेहद अहम मानी जा रही है। भारतीय वायुसेना इस सिस्टम की प्रमुख उपयोगकर्ता है, 2028 तक इसके पूर्ण संचालन की उम्मीद कर रही है। इस नए फैसले के साथ भारत की वायु रक्षा प्रणाली और मजबूत होगी, जिससे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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