मुंबई की प्रशासनिक व्यवस्था में एक ऐतिहासिक बदलाव हुआ है। वरिष्ठ IAS अधिकारी अश्विनी भिडे को बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के नए आयुक्त के रूप में नियुक्त किया गया है। वह इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला अधिकारी हैं। उन्होंने 31 मार्च को सेवानिवृत्त हुए भुषण गगरानी की जगह ली है।
1995 बैच की IAS अधिकारी भिडे वर्तमान में मुख्यमंत्री कार्यालय में अतिरिक्त मुख्य सचिव के रूप में कार्यरत थीं। इस नियुक्ति को मुंबई के प्रशासन में महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अश्विनी भिडे को उनके सख्त प्रशासनिक रुख और बड़े प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने के लिए जाना जाता है। वह पहले मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की मैनेजिंग डायरेक्टर रह चुकी हैं, जहां उन्होंने मुंबई मेट्रो विस्तार परियोजनाओं को गति दी। हालांकि उनके मेट्रो कार्यकाल के दौरान आरे कार शेड प्रकल्प को लेकर विवाद भी हुआ था। इस परियोजना में पेड़ों की कटाई को लेकर पर्यावरण समूहों ने कड़ा विरोध जताया था।
2030 तक का पूरा कार्यकाल मिलने की संभावना
IAS अश्विनी भिडे को एक संपूर्ण कार्यकाल के लिए नियुक्त किया गया है, जो 2030 तक चल सकता है। उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब मुंबई को मजबूत और प्रभावी प्रशासनिक नेतृत्व की जरूरत है। उनकी नियुक्ति से पहले संजय मुखर्जी, असीम गुप्ता और मिलिंद म्हैसकर जैसे अन्य वरिष्ठ अधिकारी के नामों पर भी विचार किया गया था।
मुंबई महानगर में प्रशासनिक आयुक्त की भूमिका बेहद अहम होती है। शहर इस समय बुनियादी ढांचे पर बढ़ते दबाव, पर्यावरणीय चुनौतियों और वित्तीय संतुलन जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे में अश्विनी भिडे का अनुभव और निर्णय क्षमता आने वाले वर्षों में शहर की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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