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Thursday, April 23, 2026
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मानव तस्करी मामलें में NIA कोर्ट दोषी ठहराए 4 बांग्लादेशी नागरिक

फर्जी भारतीय दस्तावेज, अवैध घुसपैठ और जबरन मजदूरी के बड़े नेटवर्क का खुलासा

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कर्नाटक में अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी नेटवर्क के एक बड़े मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने चार बांग्लादेशी नागरिकों को दोषी करार दिया है। दोषियों में जाकिर खान, बदल हौलदार, कबीर तालुकदार और मोहम्मद बच्चू घरामी शामिल हैं। अदालत ने सभी को तीन साल की सख्त कैद और जुर्माने की सजा सुनाई है।

जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क बांग्लादेश, असम और त्रिपुरा से जुड़ा हुआ था, जिसके जरिए बांग्लादेशी नागरिकों को अवैध रूप से भारत में लाया जाता था। छापेमारी के दौरान जांच एजेंसियों को बांग्लादेशी पासपोर्ट, मुद्रा और बड़ी संख्या में फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड, राशन कार्ड और वोटर आईडी जैसे भारतीय दस्तावेज बरामद हुए।

22 लोगों की तस्करी, जबरन मजदूरी कराई गई:

अभियोजन पक्ष के अनुसार, कम से कम 22 बांग्लादेशी नागरिकों को नौकरी और वैध पहचान का लालच देकर भारत लाया गया। भारत आने के बाद उन्हें बेंगलुरु में कचरा छंटाई (वेस्ट सेग्रिगेशन) इकाइयों में रखा गया, जहां उनसे बेहद कम मजदूरी पर काम कराया जाता था। विरोध करने पर उन्हें पुलिस के हवाले करने की धमकी दी जाती थी।

जांच में यह भी सामने आया कि पीड़ितों को भारत-बांग्लादेश सीमा के पास बेनापोल क्षेत्र से अवैध रूप से प्रवेश कराया जाता था। इसके बाद उन्हें अस्थायी शेड में रखा जाता और वहीं काम करने के लिए मजबूर किया जाता था।

कोर्ट ने कई बार खारिज की जमानत याचिकाएं:

मामले में कई आरोपियों ने जमानत के लिए आवेदन किया, लेकिन अदालत ने गंभीर आरोपों और सबूतों को देखते हुए सभी याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत ने माना कि आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया पर्याप्त सबूत हैं, जिनमें गवाहों के बयान, बरामद दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य शामिल हैं।

मुख्य आरोपी फिरदौस इस पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा था। उसने बांग्लादेश से लोगों को भारत लाने, उन्हें ठहराने और फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराने में केंद्रीय भूमिका निभाई। अदालत ने यह भी माना कि आरोपियों के फरार होने और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

चारों दोषियों ने 9 मार्च को अदालत में अपना गुनाह कबूल कर लिया था, जिसके बाद 8 अप्रैल को अदालत ने उन्हें सजा सुनाई। अदालत ने आदेश दिया कि सजा पूरी होने के बाद, यदि किसी अन्य मामले में जरूरत नहीं हो, तो दोषियों को बांग्लादेश वापस भेज दिया जाए।

इस मामले में कुल 14 आरोपी हैं, जिनमें से 4 को सजा सुनाई जा चुकी है। बाकी आरोपियों के खिलाफ ट्रायल जारी है और अगली सुनवाई 15 अप्रैल को होगी। यह मामला अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी, अवैध घुसपैठ और फर्जी दस्तावेजों के जरिए चल रहे संगठित अपराध का बड़ा उदाहरण है।

NIA की कार्रवाई और अदालत के फैसले को ऐसे नेटवर्क के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जो कमजोर लोगों का शोषण कर अवैध गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं।

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