29 C
Mumbai
Friday, April 24, 2026
होमलाइफ़स्टाइलपोषक तत्वों से भरपूर पेड़ों पर फलने वाली 'जंगल जलेबी', इम्युनिटी बूस्ट...

पोषक तत्वों से भरपूर पेड़ों पर फलने वाली ‘जंगल जलेबी’, इम्युनिटी बूस्ट कर हड्डियों को बनाती है मजबूत

Google News Follow

Related

मीठी-मीठी मिठाई जलेबी तो आपने खूब खाई होगी। लेकिन पौष्टिक तत्वों से भरपूर पेड़ों पर फलने वाली जंगल जलेबी के बारे में शायद ही सुना हो। इस अनोखे फल का आयुर्वेद में खासा स्थान है। इसका स्वाद मीठे-खट्टे का मिश्रण है, जो सेहत के लिए किसी अमृत से कम नहीं है।

आयरन, कैल्शियम, विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर यह फल इम्युनिटी बढ़ाने, पाचन सुधारने और हड्डियों को मजबूत बनाने में खासा मददगार है। जंगल जलेबी का वैज्ञानिक नाम पीथेसेलोबियम डल्स है। इसे मनीला तमरिंद या मद्रास थॉर्न के नाम से भी जाना जाता है। यह एक मध्यम आकार का सदाबहार पेड़ है, जिसकी फलियां मुड़ी हुई और जलेबी की तरह दिखती हैं। पकने पर ये फलियां लाल या गुलाबी रंग की हो जाती हैं। अंदर सफेद गूदेदार पल्प होता है, जिसमें मीठा-खट्टा स्वाद होता है। एक फली में करीब 10 बीज होते हैं।

यह फल पौष्टिक तत्वों का खजाना है। इसमें आयरन की अच्छी मात्रा होती है, जो एनीमिया से बचाता है और एनर्जी बढ़ाता है। कैल्शियम और फॉस्फोरस हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाते हैं। विटामिन सी से भरपूर होने के कारण यह इम्युनिटी बूस्ट करता है और संक्रमण से लड़ने में मदद करता है। एंटीऑक्सीडेंट्स (फ्लेवोनॉयड्स, पॉलीफेनॉल्स) शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम करते हैं, सूजन घटाते हैं और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करते हैं।

पाचन की दृष्टि से भी यह फल बेहद उपयोगी है। इसमें डाइटरी फाइबर प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो कब्ज दूर करता है, आंतों को स्वस्थ रखता है और पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है। कई अध्ययनों में इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-माइक्रोबियल और ब्लड डायबिटीज नियंत्रित करने वाले गुण भी पाए गए हैं।

पारंपरिक चिकित्सा में इसका इस्तेमाल पेट की समस्याओं, बुखार और त्वचा संबंधी परेशानियों में किया जाता है। इसके अलावा, कांटेदार होने के कारण यह पेड़ फेंसिंग और बाड़ के रूप में भी उपयोगी है। यह तेजी से बढ़ता है और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में भी मदद करता है। गर्मियों में सड़क किनारे या बाजार में आसानी से उपलब्ध यह फल बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के लिए फायदेमंद है।

खास बात है कि इसे कच्चा खाया जा सकता है या जूस बनाकर पिया जा सकता है। हालांकि, ज्यादा मात्रा में सेवन से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है।

यह भी पढ़ें:

दिग्गज गायिका आशा भोसले का 92 वर्ष की उम्र में निधन, संगीत जगत में शोक की लहर

कैंसर ठीक करने के झांसे से आदिवासियों को लुभाया, एक पादरी गिरफ्तार

आशा भोसले के निधन पर प्रधानमंत्री मोदी ने जताया शोक, बोले- “उनके गीत हमेशा गूंजते रहेंगे”

आशा भोसले के नाम दर्ज था यह गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड!

National Stock Exchange

लेखक से अधिक

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

The reCAPTCHA verification period has expired. Please reload the page.

Star Housing Finance Limited

हमें फॉलो करें

151,145फैंसलाइक करें
526फॉलोवरफॉलो करें
303,000सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

अन्य लेटेस्ट खबरें