चुनावी माहौल के बीच भारतीय राजनीतिक कार्रवाई समिति (I-PAC) ने पश्चिम बंगाल में अपने ऑपरेशन्स में बड़े बदलाव किए हैं। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने राज्य में I-PAC के काम बंद होने की खबरों को “पूरी तरह निराधार” बताया है।
सूत्रों के अनुसार, I-PAC ने राज्य में अपनी फील्ड-लेवल गतिविधियों को फिलहाल स्थगित कर दिया है, जबकि कई टीमों को वर्क-फ्रॉम-होम (WFH) मोड में शिफ्ट कर दिया गया है। यह बदलाव हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के बाद सामने आया है, जिसमें I-PAC के निदेशक विनेश चांडेल की गिरफ्तारी और शीर्ष नेतृत्व से लगातार पूछताछ शामिल है।
जानकारी के अनुसार, 18 अप्रैल को I-PAC नेतृत्व ने अपने कर्मचारियों को कानूनी कारणों का हवाला देते हुए ऑपरेशनल गतिविधियों में बदलाव के निर्देश दिए। कर्मचारियों को बाहरी संवाद सीमित करने और आधिकारिक ईमेल आईडी के उपयोग से बचने को कहा गया। इसके अलावा, मीडिया समन्वय के लिए इस्तेमाल होने वाले व्हाट्सएप ग्रुप्स में भी अचानक सन्नाटा देखा गया है, जो चुनावी समय में असामान्य माना जा रहा है।
TMC ने पहले इन खबरों को सिरे से खारिज किया, लेकिन बाद में पार्टी नेताओं ने अपेक्षाकृत संतुलित प्रतिक्रिया दी। राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा, “हम संसद में 40 सांसदों के साथ दूसरी सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी हैं। हम कई एजेंसियों के साथ काम करते हैं और सब कुछ सामान्य है। हम किसी भी युवा पेशेवर के करियर को खतरे में नहीं डालेंगे।”
पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र की भारतीय जनता पार्टी(BJP) सरकार एजेंसियों के जरिए उसके चुनावी अभियान को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। पश्चिम बंगाल में मतदान 23 और 29 अप्रैल को दो चरणोंको होना है, जबकि मतगणना 4 मई को होगी। ऐसे में I-PAC के ऑपरेशन्स में यह बदलाव राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
हालांकि, I-PAC ने अपने ऑपरेशन्स पूरी तरह बंद नहीं किए हैं। TMC के लिए कैंपेन से जुड़ी गतिविधियां जारी हैं और दोनों पक्षों के बीच समन्वय बना हुआ है। राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्मों के लिए चुनावी चक्र के अनुसार अपने संसाधनों और टीमों को समायोजित करना असामान्य नहीं है। लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में कानूनी दबाव और हालिया घटनाओं ने इस बदलाव को और ज्यादा महत्वपूर्ण बना दिया है।
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