राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल होने के बाद पहली बार खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। एक वीडियो संदेश में उन्होंने आम आदमी पार्टी (AAP) की कार्यशैली की जेन जी शैली में आलोचना करते हुए इसे “टॉक्सिक वर्कप्लेस” (विषैला कार्यस्थल) बताया।
चड्ढा ने कहा कि जिस पार्टी से वह जुड़े थे, समय के साथ वह वैसी नहीं रही। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था में काम करने और संसद में बोलने की स्वतंत्रता सीमित हो गई है। उन्होंने कहा, “आज यह पार्टी पहले जैसी नहीं रही। यहां काम करने से रोका जाता है और संसद में बोलने से भी रोका जाता है।” उन्होंने बताया कि उन्होंने करीब 15 वर्षों तक पार्टी के साथ काम किया। उन्होंने कहा, “मैं राजनीति में करियर बनाने नहीं आया था। मैंने अपने जीवन के 15 साल इस पार्टी को दिए।”
भाजपा में शामिल होने के फैसले पर उन्होंने कहा कि, वह खुद को गलत पार्टी में, सही व्यक्ति की तरह महसूस कर रहे थे। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने इस निर्णय से पहले कई विकल्पों पर विचार किया, जिनमें राजनीति छोड़ना, पार्टी के भीतर बदलाव लाने की कोशिश करना या किसी अन्य राजनीतिक मंच से जुड़ने के विकल्प मौजूद थे। चड्ढा ने यह भी कहा कि यह फैसला केवल उनका व्यक्तिगत निर्णय नहीं था। उनके अनुसार, उनके साथ कई अन्य सांसदों ने भी पार्टी से दूरी बनाई। उन्होंने कहा, “एक व्यक्ति गलत हो सकता है, दो लोग गलत हो सकते हैं, लेकिन सात लोग गलत नहीं हो सकते।”
बता दें की राघव चड्ढा समेत राज्यसभा सांसद, अशोक कुमार मित्तल, हरभजन सिंह, संदीप पाठक, विक्रमजीत सिंह साहनी, स्वाति मालीवाल और राजिंदर गुप्ता ने 24 अप्रैल को AAP छोड़कर भाजपा का रुख किया।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया का जिक्र करते हुए चड्ढा ने कहा कि पार्टी बदलने के बाद उनके फॉलोअर्स की संख्या में गिरावट आई, लेकिन उन्होंने इसे अपने फैसले पर असर डालने वाला कारक नहीं बताया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय किसी दबाव या डर के कारण नहीं, बल्कि असंतोष और निराशा के चलते लिया गया है। उन्होंने बताया है की वह पार्टी छोड़ने के बावजूद वह सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहेंगे और लोगों के मुद्दे उठाते रहेंगे।
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