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Friday, October 23, 2026
होमन्यूज़ अपडेटउद्धव ठाकरे के बयान पर भाजपा-शिवसेना भड़की, हताशा का आरोप!

उद्धव ठाकरे के बयान पर भाजपा-शिवसेना भड़की, हताशा का आरोप!

मुंबई में भाजपा विधायक राम कदम ने उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें सबसे पहले स्वयं यह समझना चाहिए कि वे किन राजनीतिक दलों के साथ रहे हैं।

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शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे के भाजपा को ‘बाबर जनता पार्टी’ कहने और राम मंदिर को लेकर दिए गए बयान पर भाजपा नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। भाजपा विधायक राम कदम, पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश, सांसद संजय जायसवाल और शिवसेना की विधान परिषद सदस्य मनीषा कायंदे ने उद्धव ठाकरे की आलोचना करते हुए इसे अनुचित और राजनीतिक हताशा से प्रेरित बताया।

मुंबई में भाजपा विधायक राम कदम ने उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें सबसे पहले स्वयं यह समझना चाहिए कि वे किन राजनीतिक दलों के साथ रहे हैं। उद्धव ठाकरे उन लोगों के साथ सत्ता में बैठे, जिन्होंने राम मंदिर पर सवाल उठाए और मंदिर निर्माण में कानूनी अड़चनें पैदा करने की कोशिश की थी।

जो लोग भगवान राम के अस्तित्व को काल्पनिक बताते रहे, उद्धव ठाकरे उन्हीं के साथ राजनीतिक गठबंधन कर चुके हैं। उनके शासनकाल में मंदिरों को बंद रखा गया, जबकि अन्य गतिविधियों को अनुमति दी गई। ऐसे में उद्धव ठाकरे को भाजपा को हिंदुत्व का पाठ पढ़ाने का कोई अधिकार नहीं है। जब राजनीतिक रूप से उनका सब कुछ समाप्त हो गया, तब उन्हें हिंदुत्व की याद आई है।

भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने उद्धव ठाकरे के बयान को गंभीरता से लेने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे आज की राजनीति में पूरी तरह अप्रासंगिक हो चुके हैं और उनके साथ जुड़े अधिकांश नेता एवं जनप्रतिनिधि उनका साथ छोड़ चुके हैं। राजनीतिक हताशा के कारण उद्धव ठाकरे इस प्रकार के बयान दे रहे हैं। उनके बयानों को न तो जनता गंभीरता से ले रही है और न ही मीडिया को अधिक महत्व देना चाहिए।

शिवसेना की विधान परिषद सदस्य मनीषा कायंदे ने भी उद्धव ठाकरे की टिप्पणी पर असहमति जताई। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे स्वयं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और उनके जैसे वरिष्ठ नेता को इस प्रकार की टिप्पणी करना शोभा नहीं देता।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने कहा कि उद्धव ठाकरे को भाजपा और उसके वैचारिक आधार पर सवाल उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। यही उद्धव ठाकरे सत्ता के लिए कांग्रेस के साथ सरकार बनाने को तैयार हो गए थे।

कांग्रेस वही पार्टी है, जिसने वर्ष 2007 में भगवान राम के अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न खड़ा किया था। मुख्यमंत्री बनने की इच्छा में उद्धव ठाकरे ने उन्हीं दलों के साथ गठबंधन किया, जो भाजपा की वैचारिक धारा के विरोधी रहे हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद और भारतीय जनता पार्टी की कई पीढ़ियों ने राम मंदिर आंदोलन और हिंदुत्व के लिए त्याग, तपस्या और बलिदान दिया है। ऐसे में भाजपा को अपनी आस्था और प्रतिबद्धता का प्रमाण किसी से लेने की आवश्यकता नहीं है।
 
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