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कमलनाथ के खिलाफ विरोध के सुर, मध्य प्रदेश में सीएम फेस को लेकर रार    

अरुण यादव ने कहा मुख्यमंत्री फेस की घोषणा कांग्रेस की परम्परा के खिलाफ   

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मध्य प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक दल तैयारियां शुरू कर दिए हैं। कांग्रेस में इसी के साथ कलह भी शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री उम्मीदवार के लिए कमलनाथ का नाम सामने आने के बाद से विरोध के सुर सुनाई दे रहे हैं। ऐसे में कई तरह के सवाल उठाने लगे हैं कि क्या मध्य प्रदेश का भी हाल अन्य राज्यों की तरह होगा और उसका फ़ायदा बीजेपी को मिलेगा। राजस्थान कांग्रेस में रार जारी है। ऐसे में माना जा रहा है कि कांग्रेस ने मध्य प्रदेश में गुटबाजी को नहीं रोका तो यहां भी चुनाव में हालात हाथ से निकल जाएंगे।
बताया जा रहा है कि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 में कमलनाथ सीएम पद के उम्मीदवार हो सकते हैं। उनका नाम सबसे आगे चल रहा है। जबकि कुछ कांग्रेस नेताओं का कहना है कि  चुनाव के बाद यह तय होगा की कौन सीएम होगा। इससे यह साफ़ हो गया है कि आगामी विधानसभा में सीएम पद को लेकर रार छिड़नी तय है। राजस्थान में भी मुख्यमंत्री पद के लिए लंबे समय से रार है। वर्तमान में अशोक गहलोत सीएम हैं। लेकिन, युवा नेता सचिन पायलट खुद को मुख्यमंत्री का दावेदार बताते हैं। आलाकमान भी पायलट को सीएम बनाना चाहता है लेकिन सीएम गहलोत सबसे बड़ी रूकावट बने हुए हैं।
इधर मध्य प्रदेश के कांग्रेस नेता अरुण यादव ने कमलनाथ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।  उनका कहना है कि मध्य प्रदेश में चुनाव के पहले सीएम चेहरा घोषित नहीं किया जाना चाहिए। सीएम कौन बनेगा यह चुनाव के बाद तय किया जाना चाहिए। इस संबंध में उन्होंने कहा था कि सीएम की घोषणा आलाकमान दिल्ली से करता है। अगर पार्टी को जादुई आकड़े मिल जाते हैं तो पहले  विधायकों की बैठक हो ,उस बैठक में तय किया जाए कि कौन सीएम बनेगा,कब बनेगा, कैसे बनेगा यह चुनाव के बाद तय होता है। अरुण यादव ने इस मामले बहुत कुछ कहा है। अजय यादव के सुर में सुर मिलाते हुए अजय सिंह ने भी कहा है कि कांग्रेस की परम्परा रही है कि वह सीएम फेस की घोषणा नहीं करती।

माना जा रहा है कि यह विरोध आगे विकराल रूप धारण कर सकता है। हालांकि, कमलनाथ छिड़वाला लोकसभा सीट से नौ बार विजयी हुए हैं और कुछ समय सीएम पद भी संभाल चुके हैं। कमलनाथ कांग्रेस के बड़े नेताओं में शुमार हैं। यह भी कहा जाता है कि कमलनाथ कांग्रेस के कई फैसले भी लेते हैं। इसलिए आलाकमान उन पर भरोसा करता है। 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने जीत दर्ज की थी। जबकि बीजेपी ने राजस्थान और गुजरात में एकतरफा जीत हासिल की थी।
          
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