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लाल किले की प्राचीर से पीएम मोदी का संबोधन, बांग्लादेश और प्राकृतिक आपदा पर जताई चिंता!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार 11वीं बार लाल किले की प्राचीर से ध्वजारोहण किया गया। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत परिवार और परिवारवाद से किया|  

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देश आज 78 वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार 11वीं बार लाल किले की प्राचीर से ध्वजारोहण किया गया। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत परिवार और परिवारवाद से किया|  

प्रधानमंत्री ने देशवासियों को किसी का नाम लिए बगैर आगाह करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार, परिवारवाद और तुष्टिकरण को लेकर विरोधी दलों पर जमकर निशाना भी साधा। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार ने देश को दीमक की तरह नोंच लिया है,लेकिन ये मोदी के जीवन का प्रतिबद्धता है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ता रहूंगा|

लाल किले की प्राचीर से पीएम नरेंद्र मोदी ने परिवारवाद पर जबरदस्त हमला बोलते हुए कहा की यह देश के विकास में दीमक तरह लगा हुआ है| इनका मूल मंत्र है- ऑफ द फैमिली, बाई द फैमिली और फॉर द फैमिली। उन्होंने कहा कि तीसरी बुराई तुष्टिकरण है जिसने देश के मूलभूत चिंतन को नुकसान पहुंचाया है। हमें इन बुराइयों के खिलाफ पूरे सामर्थ्य के साथ लड़ना है।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा प्राकृतिक आपदा के कारण हम सबकी चिंता बढ़ती चली जा रही है। अनेक लोगों ने अपने परिवार के लोगों को खोए हैं, संपत्ति खोई है। देश का नुकसान हुआ है। उन्होंने पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि देश संकट की इस घड़ी में साथ खड़ा है।

प्रधानमंत्री ने एक फिर विकसित भारत और समृद्ध भारत के संकल्प को एक बार फिर दोहराते हुए कहा कि ‘आजादी से पहले सैकड़ों साल की गुलामी का हर कालखंड संघर्ष का रहा। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के पहले भी कई आदिवासी क्षेत्र थे| 40 करोड़ देशवासियों ने वो जज्बा दिखाया, सामर्थ्य दिखाया, एक सपना और संकल्प लेकर चलते रहे- भारत की आजादी का। हमारी रगों में उन्हीं का खून है। 40 करोड़ लोगों ने गुलामी की जंजीरों को तोड़ दिया था, दुनिया की महासत्ता को उखाड़ फेंका था।’

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि 40 करोड़ लोग गुलामी की बेड़ियों को तोड़ सकते हैं, आजादी के सपने को पूरा कर सकते हैं तो 140 करोड़ मेरे परिवार के लोग अगर संकल्प लेकर, एक दिशा निर्धारित कर चल पड़ते हैं तो चुनौतियां कितनी भी क्यों न हो, संसाधनों के लिए जूझने की नौबत हो तो भी हर चुनौती को पार कर समृद्ध भारत बना सकते हैं, 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ‘बांग्लादेश में जो कुछ हुआ है। पड़ोस देश होने के नाते हम हालात को लेकर चिंतित हैं। वहां हिंदू, अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित हो। भारत हमेशा चाहता है कि हमारे पड़ोसी देश सुख और शांति के मार्ग पर चलें। शांति के प्रति हमारी प्रतिबद्धता है, हमारे संस्कार हैं। आने वाले दिनों में बांग्लादेश की विकास यात्रा के लिए हमेशा हमारी शुभेच्छा रहेगी, क्योंकि हम मानव जाति की भलाई के बारे में सोचने वाले लोग हैं।’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन में मणिपुर हिसा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर और मणिपुर, देश के अन्य हिस्सों में हिंसा का दौर चला।  पीएम ने कहा कि बेटियों की इज्जत के साथ खिलवाड़ हुआ। राज्य और केंद्र सरकार मिलकर समस्या का समाधान खोजने के लिए काम कर रही हैं। घटना मणिपुर में होती है तो देश को भी दुख होता है। हम एक हैं। हम सब मिलकर काम करेंगे।

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