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“भारतीय मिसाइलों ने नूर खान एयरबेस को बनाया निशाना”

पाकिस्तानी पीएम शाहबाज शरीफ की स्वीकारोक्ति

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शेहबाज़ शरीफ़ ने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि भारतीय सेना ने 10 मई को पाकिस्तान की रणनीतिक एयरबेस नूर ख़ान समेत कई ठिकानों को निशाना बनाया था। उन्होंने बताया कि भारतीय हमलों के तुरंत बाद “रात 2:30 बजे जनरल सैयद आसिम मुनीर ने मुझे सिक्योर लाइन पर कॉल कर बताया कि भारत की बैलिस्टिक मिसाइलों ने नूर ख़ान एयरबेस और अन्य क्षेत्रों को निशाना बनाया है।” यह बयान शुक्रवार (16 मई)को इस्लामाबाद स्थित पाकिस्तान मॉन्युमेंट में आयोजित एक समारोह में आया।

शेहबाज़ शरीफ़ की इस स्वीकारोक्ति से भारत की वह बात फिर से पुष्ट हुई है जिसमें दावा किया गया था कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के अंदर आतंकी ढांचे को नष्ट करते हुए रणनीतिक सैन्य ठिकानों को भारी क्षति पहुँचाई थी। नूर ख़ान एयरबेस, जो रावलपिंडी के चकला क्षेत्र में स्थित है और पाकिस्तान की वीआईपी ट्रांसपोर्ट स्क्वाड्रन तथा लॉजिस्टिक संचालन का मुख्य केंद्र माना जाता है, प्रमुख लक्ष्य रहा।

प्रधानमंत्री शरीफ़ ने यह भी बताया कि हमलों के बाद पाकिस्तान की वायुसेना ने “स्थानीय तकनीक और चीनी जेट्स पर आधारित अत्याधुनिक उपकरणों” की मदद से जवाबी कार्रवाई की। उन्होंने इस प्रतिक्रिया को “देश की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण” बताया। साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब वह 10 मई की सुबह तैराकी कर रहे थे, तब जनरल मुनीर ने उन्हें युद्धविराम की स्थिति के बारे में बताया। शरीफ़ के अनुसार, “जनरल आसिम मुनीर ने कहा कि हमने भारत को ताक़तवर जवाब दिया है, अब वे सीज़फायर की मांग कर रहे हैं।”

भारत सरकार की ओर से यह पुष्टि की गई है कि एयरस्ट्राइक्स के बाद पाकिस्तान के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशन्स (DGMO) ने भारतीय समकक्ष से संपर्क कर युद्धविराम की अपील की थी। भारत ने यह कार्रवाई 6 और 7 मई की रात ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के अंतर्गत की थी, जो 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की हत्या के जवाब में किया गया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 मई को राष्ट्र को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को हर हाल में जारी रखेगा और “पाकिस्तान की किसी भी परमाणु ब्लैकमेलिंग” को सहन नहीं करेगा।

इस घटनाक्रम से साफ है कि भारत की कूटनीतिक और सैन्य कार्रवाई ने पाकिस्तान को सार्वजनिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट करने पर मजबूर किया है। अब यह देखना बाकी है कि ऑपेरशन सिंदूर जैसे करारे तमाचे के बाद भी पाकिस्तानी आर्मी अपने आतंकवाद के इंफ्रास्ट्रक्चर को ध्वस्त करती है या फिर बढ़ावा देती है।

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