वैश्विक ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी के प्रभाव को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने विमानन क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को 10,000 करोड़ रुपये की एकमुश्त वित्तीय सहायता देने को मंजूरी दी गई। यह निर्णय पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण बढ़ी और अस्थिर हुई ईंधन कीमतों के प्रभाव को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है।
आधिकारिक बयान के अनुसार, यह सहायता पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की अनुदान मांगों के माध्यम से तेल विपणन कंपनियों को ब्याज-मुक्त अग्रिम राशि के रूप में प्रदान की जाएगी। इसका उद्देश्य विमानन ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की बढ़ती और अस्थिर कीमतों से होने वाले नुकसान से ओएमसी को बचाना है।
‘एटीएफ मूल्य स्थिरीकरण सहायता’ योजना 36 महीनों तक लागू रहेगी। हालांकि, इसका हर वर्ष पुनरावलोकन किया जाएगा या फिर तब तक जारी रहेगी जब तक पूरी अग्रिम सहायता राशि की वसूली और समायोजन नहीं हो जाता।
सरकारी बयान में कहा गया है कि मौजूदा असाधारण ईंधन मूल्य वृद्धि की स्थिति में एयरलाइनों को अपेक्षाकृत स्थिर दरों पर एटीएफ उपलब्ध कराने के लिए यह सहायता दी जा रही है। मंत्रिमंडल के निर्णय के अनुसार, यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में एटीएफ का आयात समता मूल्य (Import Parity Price – IPP) निर्धारित मानकों से ऊपर जाता है, तो उससे होने वाले नुकसान की भरपाई इसी निधि से की जाएगी।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब अंतरराष्ट्रीय एटीएफ कीमतों में कमी आएगी, तब तेल विपणन कंपनियों से संबंधित राशि की वसूली की जाएगी और उसे भारत के समेकित कोष (Consolidated Fund of India) में जमा कराया जाएगा। पूरी सहायता राशि की वसूली होने तक यह व्यवस्था जारी रहेगी।
यह योजना सभी इच्छुक अनुसूचित भारतीय विमानन कंपनियों के लिए उपलब्ध होगी और घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय दोनों प्रकार की उड़ानों पर लागू होगी।
नई व्यवस्था के तहत विमान कंपनियों को ईंधन लागत में अधिक स्थिरता मिलेगी और वे भविष्य के खर्च का बेहतर अनुमान लगा सकेंगी। इससे अचानक बढ़ने वाली ईंधन कीमतों के जोखिम से काफी राहत मिलने की उम्मीद है।
योजना के क्रियान्वयन के लिए भाग लेने वाली विमानन कंपनियों और तेल विपणन कंपनियों के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस समझौते पर नागरिक उड्डयन मंत्रालय और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय भी हस्ताक्षर करेंगे।
इस विशेष व्यवस्था के तहत शामिल एयरलाइनों को अधिकतम तीन वर्षों तक केवल ओएमसी से ही एटीएफ खरीदना होगा। हालांकि, इस प्रावधान की भी हर वर्ष समीक्षा की जाएगी या सहायता राशि की पूरी वसूली होने पर योजना समाप्त कर दी जाएगी।
सरकार का मानना है कि इस योजना से एयरलाइनों को ईंधन लागत का अधिक प्रभावी प्रबंधन करने में मदद मिलेगी और उनके परिचालन तथा वित्तीय नियोजन में अधिक स्थिरता आएगी। इसके सकारात्मक प्रभाव पर्यटन, होटल उद्योग, व्यापार, निर्यात, क्षेत्रीय विकास और निवेश जैसे क्षेत्रों पर भी पड़ने की उम्मीद है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय एटीएफ कीमतों में तेज वृद्धि हुई है। मार्च 2026 में एटीएफ की कीमत लगभग 60.50 रुपये प्रति लीटर थी, जो मई 2026 तक बढ़कर 142 रुपये प्रति लीटर हो गई। यानी मात्र दो महीनों में कीमत लगभग ढाई गुना बढ़ गई, जिससे विमानन कंपनियों की लागत पर भारी दबाव पड़ा है।
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