प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की है। रिपोर्टों के अनुसार, यह जांच विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के कथित उल्लंघन से संबंधित है। फेमा कानून का मुख्य उद्देश्य भारत में विदेशी मुद्रा लेन-देन की निगरानी और विनियमन करना है।
इस कार्रवाई को लेकर वेदांत लिमिटेड की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
जब ईडी को किसी कंपनी या व्यक्ति द्वारा विदेशी मुद्रा लेन-देन से जुड़े नियमों के उल्लंघन का संदेह होता है, तो वह फेमा के तहत जांच और कार्रवाई करती है। ऐसे मामलों में अक्सर विदेशों में धन का अवैध हस्तांतरण, हवाला लेन-देन, विदेश में संपत्तियों का अवैध अधिग्रहण या विदेशी निवेश संबंधी नियमों का पालन न करना शामिल होता है।
वेदांता भारत की सबसे बड़ी प्राथमिक एल्युमिनियम उत्पादक कंपनियों में से एक है। समूह देश की कुल एल्युमिनियम आवश्यकता का लगभग 81 प्रतिशत उत्पादन करता है। कंपनी केयर्न इंडिया के माध्यम से कच्चे तेल का उत्पादन भी करती है। वेदांता समूह ने आने वाले वर्षों में भारत में लगभग 2 लाख करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बनाई है।
वेदांता समूह इससे पहले भी वर्ष 2004 में विदेशी मुद्रा मामलों को लेकर नियामकीय जांच के दायरे में आ चुका है। वर्ष 2004 में ईडी ने स्टरलाइट इंडस्ट्रीज और उसके तीन प्रवर्तक निदेशकों को विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम (FERA) तथा फेमा (FEMA) के उल्लंघन का दोषी ठहराया था। उस समय कंपनी और उसके निदेशकों पर जुर्माना भी लगाया गया था।
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