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मेहुल चोकसी को भगोड़ा घोषित करने की ED की याचिका में फिर देरी

जज ट्रांसफर से अटका मामला

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प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी को भगोड़ा आर्थिक अपराधी (FEO) घोषित करने की याचिका एक बार फिर देरी का शिकार हो गई है। मुंबई की विशेष अदालत में जज के ट्रांसफर के चलते अब इस मामले की सुनवाई नए सिरे से करनी होगी, जिससे वर्षों से लंबित यह प्रक्रिया और खिंच गई है।

पिछले महीने ED ने अपनी दलीलें पूरी कर ली थीं और 24 मार्च को अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह तथा ED की ओर से वकील कविता पाटिल ने कोर्ट में पक्ष रखा था। मामले में 3 अप्रैल को सुनवाई कर रहे विशेष जज ए.वी. गुजराथी का तबादला कर दिया गया। इसके बाद 4 अप्रैल को नए विशेष जज नितिन जिवाने ने पदभार संभाला।

गुरुवार (9 अप्रैल)को सुनवाई के दौरान स्पष्ट हुआ कि नए जज के सामने ED को अपनी दलीलें फिर से पेश करनी होंगी। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल की अनुपस्थिति के कारण अब मामले की अगली सुनवाई 24 अप्रैल के लिए तय की गई है।

यह मामला 2018 से लंबित है, जब ED ने चोकसी और उसके भांजे नीरव मोदी को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने की मांग की थी। नीरव मोदी को 8 जून 2020 को अदालत ने भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर दिया था, लेकिन चोकसी के खिलाफ याचिका अब तक लंबित है।

चोकसी पंजाब नेशनल बैंक (PNB) घोटाले का मुख्य आरोपी है। वह 2 जनवरी 2018 को भारत छोड़कर चला गया था और वापस नहीं लौटा। इसके बाद फरवरी 2018 में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने चोकसी और नीरव मोदी के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

हाल ही में 11 अप्रैल को बेल्जियम के एंटवर्प में चोकसी को स्थानीय पुलिस ने CBI के प्रत्यर्पण अनुरोध के आधार पर गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद चोकसी के वकीलों ने दलील दी कि FEO एक्ट के तहत चल रही कार्यवाही को समाप्त किया जाए, लेकिन अदालत ने इस मांग को खारिज करते हुए ED की याचिका पर सुनवाई जारी रखने का फैसला किया।

लगातार हो रही देरी ने एक बार फिर न्यायिक प्रक्रिया की गति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आठ साल बाद भी इस महत्वपूर्ण मामले में अंतिम फैसला नहीं आ सका है, जिससे एजेंसियों और न्याय व्यवस्था दोनों पर दबाव बढ़ रहा है। अब 24 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि क्या ED की याचिका आगे बढ़ पाती है या प्रक्रिया और लंबी खिंचती है।

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