महाराष्ट्र में देश के सबसे बड़े निजी आर्टिलरी शेल प्लांट का उद्घाटन, सालाना 5 लाख गोले होंगे तैयार

शिरडी में ₹1000 करोड़ की रक्षा निर्माण परियोजना शुरू, ड्रोन, रॉकेट लॉन्चर और आधुनिक हथियार प्रणालियों का भी होगा निर्माण

महाराष्ट्र में देश के सबसे बड़े निजी आर्टिलरी शेल प्लांट का उद्घाटन, सालाना 5 लाख गोले होंगे तैयार

India's largest private artillery shell plant inaugurated in Maharashtra, producing 5 lakh shells annually

भारत ने रक्षा निर्माण क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए महाराष्ट्र के शिरडी में देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के आर्टिलरी शेल निर्माण संयंत्र का उद्घाटन किया है। लगभग ₹1000 करोड़ की लागत से बने इस अत्याधुनिक प्लांट में हर साल 5 लाख 155 मिमी आर्टिलरी शेल तैयार किए जा सकेंगे। इसे भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। रक्षा उत्पादन क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

राजनाथ सिंह ने इस रक्षा परिसर का उद्घाटन किया। इस अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ अनिल चौहान और डीआरडीओ प्रमुख समीर कामत भी मौजूद रहे।

अहिल्यानगर जिले के सावली विहिर औद्योगिक क्षेत्र में 200 एकड़ में फैले इस संयंत्र को NIBE लिमिटेड और ग्लोब फोर्ज लिमिटेड ने विकसित किया है। यह परियोजना केंद्र सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है।

इस प्लांट में केवल आर्टिलरी शेल ही नहीं, बल्कि रॉकेट लॉन्चर सिस्टम, लंबी दूरी के रॉकेट कंपोनेंट, ड्रोन, विस्फोटक सामग्री और एडवांस इलेक्ट्रॉनिक टेस्टिंग सिस्टम का भी निर्माण किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार यहां कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोबोटिक्स और स्वायत्त प्रणालियों जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा, जिससे भविष्य के मल्टी-डोमेन युद्धों की जरूरतों को ध्यान में रखकर उत्पादन किया जा सके।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत, जिसे कभी रक्षा उपकरणों का आयातक देश माना जाता था, अब तेजी से वैश्विक रक्षा निर्यातक के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में रक्षा क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी 30-35 प्रतिशत से बढ़कर 50 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।

उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान NIBE समूह और एक इजरायली कंपनी के बीच सीप्लेन और ऑप्टिकल सैटेलाइट तकनीक के विकास को लेकर समझौते भी हुए। इसे भारत के रक्षा औद्योगिक ढांचे को और विविध बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

NIBE समूह के कार्यकारी निदेशक गणेश निबे ने कहा कि उनकी कंपनी पहले से पिनाका, गरुड़ास्त्र, वायुअस्त्र और ब्रह्मोस से जुड़े विभिन्न मिसाइल कंपोनेंट्स के निर्माण में योगदान दे रही है। उन्होंने कहा कि नया संयंत्र भारत के रक्षा इकोसिस्टम को और मजबूत करेगा।

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने कहा कि भारत पहले ही 100 से अधिक देशों को मिसाइल और रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है। उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्ध नवाचार, उत्पादन क्षमता और मजबूत औद्योगिक ढांचे से तय होंगे। उनके अनुसार AI आधारित हथियार प्रणालियां पारंपरिक हथियारों की जगह ले रही हैं और शिरडी जैसी परियोजनाएं भारत की रणनीतिक तैयारी के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि इस परियोजना ने अहिल्यानगर को रक्षा निर्माण केंद्र के रूप में नई पहचान दी है। उन्होंने बताया कि भविष्य में यहां सीप्लेन निर्माण परियोजना भी शुरू की जाएगी, जिससे भारत की आत्मनिर्भरता और मजबूत होगी। इस परियोजना से लगभग 2,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की उम्मीद है। साथ ही क्षेत्र के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSMEs) को भी बड़े स्तर पर अवसर मिलेंगे।

इसके अलावा श्रीगोंदा तालुका के बेलवंडी क्षेत्र में ₹2000 करोड़ की लागत से एक और आयुध निर्माण इकाई विकसित की जा रही है। वहां TNT, RDX और HMX जैसे विस्फोटकों का उत्पादन होगा। अनुमान है कि दोनों परियोजनाएं मिलकर 4,000 से 5,000 लोगों को रोजगार दे सकती हैं।

उद्घाटन के अवसर पर शिरडी में दो दिवसीय रक्षा प्रदर्शनी भी आयोजित की गई, जिसमें देश की प्रमुख रक्षा कंपनियों और 100 से अधिक MSMEs ने अपनी तकनीक और निर्माण क्षमता का प्रदर्शन किया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना भारत को वैश्विक रक्षा निर्माण केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे देश की घरेलू रक्षा जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ आने वाले वर्षों में सैन्य निर्यात क्षमता भी तेजी से बढ़ेगी।

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