रिलायंस को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत: RPL ट्रेडिंग केस में फ्रॉड के आरोप और ₹447 करोड़ का डिस्गॉर्जमेंट आदेश रद्द

2007 के चर्चित रिलायंस पेट्रोलियम फ्यूचर्स मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला, ₹25 करोड़ का जुर्माना बरकरार

रिलायंस को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत: RPL ट्रेडिंग केस में फ्रॉड के आरोप और ₹447 करोड़ का डिस्गॉर्जमेंट आदेश रद्द

Reliance gets major relief from Supreme Court: Fraud charges and ₹447 crore disgorgement order in RPL trading case quashed

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (29 मई) को रिलायंस इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड (RIL) को 2007 के रिलायंस पेट्रोलियम लिमिटेड (RPL) फ्यूचर्स ट्रेडिंग मामले में बड़ी राहत देते हुए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के फ्रॉड और बाजार में हेरफेर से जुड़े निष्कर्षों को रद्द कर दिया। इसके साथ ही अदालत ने रिलायंस पर लगाए गए ₹447.27 करोड़ के डिस्गॉर्जमेंट आदेश को भी निरस्त कर दिया।

हालांकि शीर्ष अदालत ने SEBI द्वारा लगाया गया ₹25 करोड़ का अलग जुर्माना बरकरार रखा है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने SEBI को निर्देश दिया कि वह रिलायंस द्वारा पहले से जमा कराए गए ₹250 करोड़ वापस करे।

यह मामला नवंबर 2007 में रिलायंस पेट्रोलियम लिमिटेड (RPL) के शेयरों और फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स में हुई ट्रेडिंग से जुड़ा है। उस समय RPL, रिलायंस इंडस्ट्रीज़ की सूचीबद्ध सहायक कंपनी थी और उसमें RIL की लगभग 75 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। कंपनी उस दौरान अपने लगभग 22.5 करोड़ शेयर बेचने की योजना बना रही थी, जो उसकी कुल हिस्सेदारी का करीब 5 प्रतिशत हिस्सा था।

SEBI की जांच के अनुसार, रिलायंस ने 12 अलग-अलग संस्थाओं का इस्तेमाल करते हुए RPL के फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स में बड़े स्तर पर शॉर्ट पोजिशन बनाई थी। इसके साथ ही कंपनी ने कैश मार्केट में भी भारी मात्रा में शेयरों की बिक्री की।

नियामक संस्था SEBI का आरोप था कि 29 नवंबर 2007 को ट्रेडिंग के आखिरी मिनटों में रिलायंस ने बड़ी संख्या में RPL के शेयर बेचे। SEBI के मुताबिक इस रणनीति का उद्देश्य RPL फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स की सेटलमेंट कीमत को नीचे लाना था, जिससे कंपनी को अनुचित लाभ मिला।

इन निष्कर्षों के आधार पर SEBI ने वर्ष 2017 में रिलायंस को ₹447.27 करोड़ और उस पर ब्याज लौटाने का आदेश दिया था। साथ ही कंपनी और उससे जुड़ी इकाइयों को एक साल के लिए इक्विटी डेरिवेटिव्स बाजार में ट्रेडिंग करने से भी प्रतिबंधित किया गया था। रिलायंस ने इस आदेश को सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) में चुनौती दी थी। SAT ने वर्ष 2020 में SEBI के फैसले को बरकरार रखा था। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

अब सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने SEBI के फ्रॉड और मार्केट मैनिपुलेशन से जुड़े निष्कर्षों को पलटते हुए रिलायंस को बड़ी राहत दी है। अदालत ने डिस्गॉर्जमेंट आदेश भी रद्द कर दिया है।

हालांकि अदालत ने SEBI के एडजुडिकेटिंग ऑफिसर द्वारा लगाया गया ₹25 करोड़ का जुर्माना बरकरार रखा है। इस फैसले के साथ भारतीय शेयर बाजार के सबसे चर्चित मामलों में से एक को आंशिक रूप से कानूनी विराम मिल गया है।

इस फैसले को भारतीय कॉर्पोरेट और निवेश जगत में काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह मामला लंबे समय से बाजार नियमन, फ्यूचर्स ट्रेडिंग और कॉर्पोरेट जवाबदेही को लेकर चर्चा में रहा है।

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