पेशावर में सरकार द्वारा लागू किए गए स्मार्ट लॉकडाउन के खिलाफ व्यापारियों ने विरोध प्रदर्शन किया। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, खैबर पख्तूनख्वा व्यापारी संगठन के नेतृत्व में निकाले गए इस मार्च में बड़ी संख्या में दुकानदारों और व्यवसायियों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए स्मार्ट लॉकडाउन को तुरंत वापस लेने, पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें कम करने और महंगाई पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
पाकिस्तान के द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान व्यापारी संगठनों के नेताओं ने सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की। एक वक्ता ने कहा, “लॉकडाउन से न तो सरकार को फायदा हुआ है और न ही व्यापारियों को। दुकानों को रात 8 बजे तक बंद करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जबकि भीषण गर्मी के कारण लोग शाम के बाद ही खरीदारी के लिए निकलते हैं। यह फैसला न ऊर्जा संकट हल कर पाया और न ही पेट्रोलियम उत्पादों के मामले में जनता को कोई राहत मिली।”
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पेट्रोल की लगातार बढ़ती कीमतों के कारण जरूरी वस्तुएं भी आम लोगों की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं। उनका कहना था, “ईंधन की कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि आम नागरिक अब अपनी बुनियादी जरूरतें भी पूरी नहीं कर पा रहे हैं। सरकार को लॉकडाउन का फैसला तुरंत वापस लेना चाहिए और महंगाई रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।”
व्यापारी समुदाय ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार उनकी मांगें नहीं मानती, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की “गलत और अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाली नीतियों” के खिलाफ उनका संघर्ष जारी रहेगा।
इससे पहले 9 मई को भी पेशावर और पूरे खैबर पख्तूनवा प्रांत में परिवहन व्यवसायियों ने पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के खिलाफ प्रदर्शन किया था। दर्जनों ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर पेशावर के हाजी कैंप टर्मिनल पर एकत्र हुए और पेट्रोल-डीजल की कीमतें तत्काल कम करने की मांग की। प्रदर्शन को संबोधित करते हुए परिवहन नेता जुबैर अहमद कुरैशी ने कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जबकि CNG भी उपलब्ध नहीं है।
हालिया ईंधन मूल्य वृद्धि के बाद परिवहन किराए में एक महीने के भीतर पांचवीं बार बढ़ोतरी की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, एसी वाहनों के किराए में बड़ी वृद्धि हुई है, जबकि नॉन-एसी बसों के किराए में भी करीब पांच प्रतिशत तक इजाफा किया गया है। पाकिस्तान में बढ़ती महंगाई, ईंधन संकट और सरकारी नीतियों के खिलाफ जनता का असंतोष लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है।
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