प्रवर्तन निदेशालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत मुंबई में रिलायंस अनिल अंबानी समूह (ADG) के दो पूर्व अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी ने रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड के पूर्व निदेशक सतीश सेठ और गौतम दोशी को हिरासत में लिया है और उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर रखा गया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मार्च महीने में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) से जुड़े 114.98 करोड़ रुपये के कथित कर्ज धोखाधड़ी मामले में इन दोनों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। उस समय उनके विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी भी की गई थी।
सतीश सेठ इससे पहले रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के उपाध्यक्ष रह चुके हैं। उन्हें आगे की कस्टडी के लिए दिल्ली की अदालत में पेश किया जाएगा। इस बीच, रिलायंस समूह के प्रवक्ता ने एक बयान जारी कर कहा, “सतीश सेठ (उम्र 70 वर्ष) और गौतम दोशी (उम्र 73 वर्ष) का अब समूह से कोई संबंध नहीं है।” प्रवक्ता ने आगे बताया, “सतीश सेठ ने समूह के प्रबंध निदेशक और कई कंपनियों में निदेशक के रूप में काम किया था। उन्होंने 2025 में समूह छोड़ दिया था। गौतम दोशी ने भी समूह के प्रबंध निदेशक और समूह के भीतर व बाहर कई कंपनियों में निदेशक के रूप में जिम्मेदारियां संभाली थीं। वह 2020 में, यानी करीब छह साल पहले समूह से बाहर हो गए थे।”
सीबीआई के अनुसार, भारतीय स्टेट बैंक उन 11 बैंकों के संघ (कॉन्सोर्टियम) का हिस्सा था, जिसने रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड को कुल 735 करोड़ रुपये का सावधि ऋण (टर्म लोन) स्वीकृत किया था। इसी कर्ज धोखाधड़ी मामले में दर्ज शिकायत के आधार पर ईडी ने सतीश सेठ और गौतम दोशी की भूमिका की जांच शुरू की है।
इससे पहले जून महीने में सीबीआई ने रिलायंस कम्युनिकेशंस के पूर्व समूह प्रबंध निदेशक अमिताभ झुनझुनवाला को भी कथित कर्ज धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार किया था। अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले के कारण एसबीआई को करीब 2,929.05 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। अदालत में पेश किए जाने के बाद उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया था।
इस बीच, राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) ने गुरुवार को भारतीय उद्योगपति अनिल अंबानी के खिलाफ व्यक्तिगत दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया। यह कार्रवाई रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) और रिलायंस इन्फ्राटेल लिमिटेड (RITL) को दिए गए ऋणों के लिए उनके द्वारा दी गई व्यक्तिगत गारंटी के आधार पर की गई है। इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए अनिल अंबानी के प्रवक्ता ने कहा कि आदेश की प्रति मिलने के बाद उनकी कानूनी टीम इसका अध्ययन करेगी और कानूनी सलाह के अनुसार उचित न्यायिक मंच पर इसे चुनौती देगी।
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