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मुस्लिम छात्राओं पर FIR रद्द करने से इनकार; हिंदू लड़की को इस्लाम अपनाने के लिए बनाया दबाव

इलाहाबाद उच्च न्यायालय का फैसला

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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हाल ही में देश के युवाओं में बढ़ती धार्मिक कट्टरता पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे एक चिंताजनक प्रवृत्ति बताया है। अलिना उर्फ अलिना परवीन और शाबिया नाम की दो मुस्लिम छात्राओं द्वारा अपने खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने की मांग वाली रिट याचिकाओं की सुनवाई के दौरान अदालत ने यह टिप्पणी की। कक्षा 12 में पढ़ने वाली इन छात्राओं के खिलाफ अपनी हिंदू सहेली पर धार्मिक आस्था थोपने के आरोप में उत्तर प्रदेश धर्मांतरण प्रतिषेध अधिनियम, 2021 के तहत FIR दर्ज की गई थी।

न्यायमूर्ति जे. जे. मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की पीठ ने इन छात्राओं की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया उनके खिलाफ मामला बनता है, इसलिए जांच में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। याचिका खारिज करते हुए अदालत ने कहा, “यदि युवाओं में इस तरह की प्रवृत्ति दिखाई दे रही है, तो यह और भी चिंताजनक है। यह जीवन का वह समय है जब उन्हें शिक्षा के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं को विकसित करने और समाज व राष्ट्र की सेवा के लिए खुद को तैयार करने पर ध्यान देना चाहिए।”

उच्च न्यायालय ने 16 अप्रैल 2026 के अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश अवैध धर्मांतरण प्रतिषेध अधिनियम, 2021 ऐसे मामलों को रोकने के लिए महत्वपूर्ण है, जहां लोग अपनी धार्मिक मान्यताओं को दूसरों पर थोपने की कोशिश करते हैं। अदालत ने कहा, “इस कानून को समाज में उत्पन्न उस गंभीर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लागू किया गया था, जहां कुछ लोग अपने धर्म का पालन या प्रचार करने के बजाय उसे दूसरों पर थोपने का प्रयास करते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि उनका धर्म ही सभी को मानना चाहिए।”

अदालत ने यह भी कहा कि धार्मिक दबाव और जबरन धर्मांतरण जैसी समस्याओं से निपटने के लिए यह कानून समय की आवश्यकता था। अदालत ने कहा,“यदि ऐसे उभरते हुए सामाजिक खतरे को रोकने के लिए बनाए गए कानून को शुरुआती चरण में ही रोक दिया जाए, तो उसका उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।”

क्या है मामला?

पीड़िता के भाई ने 22 जनवरी 2026 को मुरादाबाद के बिलारी थाने में उत्तर प्रदेश कानून की धारा 3 और 5(1) के तहत FIR दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, आरोपी छात्राएं उसकी बहन कुमारी महिमा के साथ एक कोचिंग सेंटर में पढ़ती थीं। उसने आरोप लगाया कि उन्होंने उसकी बहन को जबरन बुर्का पहनने के लिए मजबूर किया और इस्लाम अपनाने का दबाव बनाया। साथ ही उसने आशंका जताई कि इसके पीछे कोई बड़ा षड्यंत्र हो सकता है।

आरोपों से इनकार करते हुए अलिना ने कहा कि पीड़िता के भाई द्वारा दिए गए कथित प्रेम प्रस्ताव को ठुकराने के कारण बदले की भावना से उसके खिलाफ FIR दर्ज कराई गई है। उसने यह भी आरोप लगाया कि पीड़िता का भाई उसका पीछा करता था और उसने उसे शादी का प्रस्ताव भी दिया था।

पीड़िता ने न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए गए अपने बयान में 20 जनवरी 2026 की घटना का विवरण दिया। उसके अनुसार, कोचिंग के बाद उसकी सहेली अलिना और उसकी चार अन्य सहेलि मालिशका, शबिया, रिमशा और जेहरा उसे नाश्ते के लिए एक रेस्टोरेंट ले गईं। वहां जाने से पहले अलिना ने उसे जबरदस्ती बुर्का पहनने को कहा। मना करने पर सभी ने मिलकर उसे बुर्का पहना दिया।

पीड़िता के अनुसार, आरोपी छात्राएं उसे लगातार इस्लाम स्वीकार करने के लिए प्रेरित करती थीं। वे अपने धर्म को बेहतर बताते हुए उसे समझाने की कोशिश करती थीं। उन्होंने कुरान के बारे में जानकारी दी और कहा कि इसे 40 दिनों में पूरा पढ़ा जा सकता है। इसके अलावा, वे उसे मांसाहारी भोजन खाने के लिए भी मजबूर करती थीं।

अदालत ने उस स्थान के सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की, जहां कथित रूप से पीड़िता को बुर्का पहनाया गया था। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि हालांकि अलिना ने पीड़िता के भाई पर पीछा करने और शादी का प्रस्ताव देने का आरोप लगाया, लेकिन उसने इस संबंध में कोई आधिकारिक शिकायत या FIR  दर्ज नहीं कराई।

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