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अहमदाबाद विमान हादसा रिपोर्ट : पायलट संगठन ने उठाए सवाल, न्यायिक जांच की मांग की!

उन्होंने कहा, “पायलट लोगों की जान लेने के लिए विमान नहीं उड़ाते। बिना ठोस तकनीकी प्रमाण के उन्हें दोषी ठहराना उचित नहीं है।”

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एयर इंडिया की एआई-171 बोइंग 787 विमान दुर्घटना (जिसमें 260 से अधिक लोगों की मौत हुई थी) को लेकर फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (एफआईपी) ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रारंभिक जांच रिपोर्ट पर सवाल उठाए और पूरे मामले की पारदर्शी न्यायिक जांच की मांग की।

एफआईपी के अध्यक्ष कैप्टन सी.एस. रंधावा ने कहा कि संगठन ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और मांग की है कि दुर्घटना के सभी तकनीकी, इलेक्ट्रिकल और सिस्टम संबंधी पहलुओं की स्वतंत्र जांच कराई जाए। उन्होंने कहा, “पायलट लोगों की जान लेने के लिए विमान नहीं उड़ाते। बिना ठोस तकनीकी प्रमाण के उन्हें दोषी ठहराना उचित नहीं है।”

एफआईपी ने दावा किया कि प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में दिए गए घटनाक्रम और स्वतंत्र सिम्युलेटर परीक्षणों के परिणामों में बड़ा अंतर है। संगठन के अनुसार, रिपोर्ट में विमान के हाइड्रोलिक सिस्टम के चार सेकंड में सक्रिय होने की बात कही गई है, जबकि प्रमाणित बोइंग 787 सिम्युलेटर पर किए गए 10 परीक्षणों में राम एयर टरबाइन (रैट) को सक्रिय होकर हाइड्रोलिक दबाव बनाने में लगभग 18 सेकंड लगे।

संगठन ने यह भी कहा कि ईंधन नियंत्रण स्विच पायलटों द्वारा जानबूझकर बंद किए जाने का कोई स्पष्ट निष्कर्ष रिपोर्ट में नहीं दिया गया है। एफआईपी ने आशंका जताई कि किसी तकनीकी या इलेक्ट्रिकल खराबी के कारण विमान के कंप्यूटर सिस्टम ने स्वतः ईंधन आपूर्ति बंद की हो सकती है।

एफआईपी ने बोइंग 787 विमानों में पहले सामने आ चुकी तकनीकी समस्याओं और एयर इंडिया के रखरखाव संबंधी मुद्दों का भी उल्लेख किया। संगठन ने दावा किया कि दुर्घटना से पहले विमान के एयरक्राफ्ट हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम से भेजे गए 11 मेंटेनेंस कोड्स को प्रारंभिक रिपोर्ट में शामिल नहीं किया गया।

संगठन ने जांच समिति की संरचना पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें बोइंग 787 के अनुभवी विशेषज्ञों की पर्याप्त भागीदारी नहीं है और डीजीसीए अधिकारियों की मौजूदगी हितों के टकराव का कारण बन सकती है।

एफआईपी ने केंद्र सरकार से एयरक्राफ्ट रूल्स के नियम-12 के तहत न्यायिक जांच गठित करने की मांग करते हुए कहा कि तकनीकी सच्चाई सामने आए बिना पायलटों को दोषी ठहराना न्यायसंगत नहीं होगा और पीड़ित परिवारों को भी पूरी पारदर्शिता के साथ न्याय मिलना चाहिए।

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