मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) स्थित नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के एम्फीथिएटर में आयोजित भव्य समारोह में वरिष्ठ पत्रकार और न्यूज कंटीन्यूअस के संपादक डॉ. मयूर पारिख को प्रतिष्ठित ‘देवर्षि नारद पत्रकारिता पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान विश्व संवाद केंद्र, मुंबई की ओर से मीडिया क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले पत्रकारों को प्रदान किया जाता है और इस वर्ष पुरस्कार का 26वां संस्करण आयोजित किया गया।
इस कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय लोकनीति विशेषज्ञ और प्रसिद्ध लेखक संदीप वासलेकर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने भारतीय संस्कृति के ‘वसुधैव कुटुंबकम’ विचार की महत्ता बताते हुए कहा कि “जहां संस्कृति होती है, वहां संघर्ष के लिए कोई स्थान नहीं होता।” उन्होंने यह भी चिंता जताई कि दुनिया भर में भारत के समावेशी विचारों को दबाने की कोशिश की जा रही हैं।
पत्रकारिता में लंबे और प्रभावशाली योगदान के लिए डॉ. मयूर पारिख का विशेष सम्मान किया गया। पिछले 25 वर्षों से वे मीडिया क्षेत्र में सक्रिय हैं और Zee News तथा ABP News जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। उन्होंने देशभर में 25 से अधिक चुनावों की ग्राउंड रिपोर्टिंग की है और वर्तमान में डिजिटल मीडिया जर्नलिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। उनकी गहन और निर्भीक पत्रकारिता को देखते हुए उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया।
इसी समारोह में वरिष्ठ पत्रकार गणेश उर्फ भाऊ तोरसेकर को ‘जीवन गौरव पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। इसके अलावा विभिन्न श्रेणियों में कई पत्रकारों और सोशल मीडिया क्षेत्र से जुड़े व्यक्तित्वों का भी सम्मान किया गया।
कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में मौजूद लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) आर. आर. निंभोरकर ने भारत की बढ़ती रक्षा क्षमता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश का रक्षा निर्यात कारोबार 30 हजार करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है। वहीं मुख्य वक्ता प्रशांत पोळ ने कहा कि संवाद ही भारतीय संस्कृति की असली पहचान है और संवाद युद्ध से कहीं श्रेष्ठ है।
विश्व संवाद केंद्र के अध्यक्ष सुधीर जोगळेकर ने कहा कि समाज हित और राष्ट्रहित के लिए कार्य करने वाले पत्रकारों का सम्मान करना ही इस पहल का मुख्य उद्देश्य है। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. निशीथ के. भांडारकर के प्रास्ताविक से हुई, जबकि समापन चंद्रशेखर वझे के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
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