भारत से अफ्रीका भेजी गई 43 टन राहत सामग्री

इबोला संकट से लड़ने के लिए भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ

भारत से अफ्रीका भेजी गई 43 टन राहत सामग्री

43 tonnes of relief material sent from India to Africa

इबोला महामारी से निपटने के लिए भारत ने एक बार फिर अफ्रीका की सहायता के लिए कदम बढ़ाया है। इसी क्रम में मंगलवार (2 जून) को भारत ने Africa Centres for Disease Control and Prevention को चिकित्सा सहायता की दूसरी खेप रवाना की है। इस खेप में सुरक्षात्मक उपकरण, जांच एवं निगरानी उपकरण, दवाइयां और पोषण संबंधी सामग्री शामिल हैं।

भारत को विश्वास है कि 43 टन वजनी यह राहत सामग्री अफ्रीका की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाएगी तथा इबोला महामारी से निपटने की क्षमता बढ़ाने में मदद करेगी।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, “भारत ने अफ्रीका सीडीसी को चिकित्सा सहायता की दूसरी खेप भेजी है। इसमें सुरक्षात्मक उपकरण, जांच एवं निगरानी साधन, दवाइयां और पोषण सामग्री शामिल हैं। हमें विश्वास है कि 43 टन की यह खेप अफ्रीका की सार्वजनिक स्वास्थ्य तैयारियों को मजबूत करेगी और इबोला के खिलाफ प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ाएगी।”

इससे पहले 24 मई को भारत ने अफ्रीका सीडीसी को आपातकालीन चिकित्सा सामग्री और सुरक्षा किट की पहली खेप भेजी थी। 29 मई को भारत ने इबोला से प्रभावित देशों और अफ्रीका सीडीसी को भविष्य में भी आवश्यक सहायता जारी रखने का आश्वासन दिया था।

नई दिल्ली में आयोजित साप्ताहिक प्रेस वार्ता में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जैसवाल ने बताया कि अफ्रीका सीडीसी के लिए भेजी गई चिकित्सा सामग्री युगांडा में भारत के उच्चायुक्त उपेन्दर सिंह रावत ने संबंधित अधिकारियों को सौंप दी है।

इस बीच, 31 मई को अफ्रीका सीडीसी ने लोकशाही गणतंत्र काँगो में इबोला महामारी से लड़ने के प्रयासों के लिए भारत द्वारा प्रदान की गई आपातकालीन चिकित्सा सहायता का स्वागत किया और इस स्वास्थ्य संकट के दौरान भारत के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने 17 मई को इबोला को अंतरराष्ट्रीय चिंता की सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित किया था। इबोला एक अत्यंत गंभीर और कई मामलों में जानलेवा बीमारी है। यह संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक द्रवों, दूषित वस्तुओं या संक्रमित जानवरों के सीधे संपर्क से फैलता है।

इस बीमारी के प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, उल्टी, दस्त तथा गंभीर मामलों में आंतरिक और बाहरी रक्तस्राव शामिल हैं।

पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अफ्रीकी देशों को चिकित्सा सहायता प्रदान करने में लगातार वृद्धि की है। विशेष रूप से COVID-19 महामारी के दौरान भारत ने दवाओं और टीकों की बड़े पैमाने पर आपूर्ति कर वैश्विक स्वास्थ्य सहयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

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