चिप निर्यात के नियमों पर बदलाव लाने की सोच रहा अमेरिका!

चिप निर्यात के नियमों पर बदलाव लाने की सोच रहा अमेरिका!

America is thinking of making changes in the rules of chip export

अमेरिका उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) चिप्स के निर्यात को नियंत्रित करने के लिए एक नए नियामक ढांचे पर विचार कर रहा है, जिसके तहत बड़े पैमाने पर चिप्स प्राप्त करने वाले विदेशी देशों को अमेरिकी AI इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश करना या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े आश्वासन देना पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार यह प्रस्ताव अभी आंतरिक चर्चा के चरण में है और अंतिम रूप दिए जाने से पहले इसमें बदलाव संभव है।

रिपोर्ट के मुताबिक यह प्रस्ताव पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल में लागू किए गए “AI diffusion” नियमों को रद्द किए जाने के बाद अमेरिकी प्रशासन का पहला बड़ा प्रयास होगा, जिसके तहत सहयोगी देशों और साझेदारों को भी AI चिप्स की आपूर्ति के लिए नए मानदंडों का सामना करना होगा।

मसौदा ढांचे के अनुसार जो देश 2 लाख या उससे अधिक उन्नत AI चिप्स आयात करना चाहते हैं, उन्हें अमेरिका में AI डेटा सेंटर्स में निवेश करने या वॉशिंगटन को सुरक्षा आश्वासन देने की शर्त पूरी करनी पड़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अमेरिकी प्रशासन को विदेशी भागीदारों के साथ निवेश समझौतों पर बातचीत में अधिक रणनीतिक लाभ मिल सकेगा, जो घरेलू तकनीकी ढांचे को मजबूत करने की नीति से भी जुड़ा हुआ है।

यह प्रस्ताव अमेरिकी निर्यात नीति में महत्वपूर्ण बदलाव होगा। बाइडेन प्रशासन के दौरान लागू नियंत्रण इस सिद्धांत पर आधारित थे कि करीबी सहयोगी देशों को उच्चस्तरीय चिप निर्यात पर व्यापक छूट दी जाए। हालांकि नए मसौदे में लाइसेंसिंग आवश्यकताओं को अधिक व्यापक रूप से लागू करने की संभावना जताई गई है, जिससे मित्र देशों पर भी प्रतिबंधात्मक प्रक्रियाएं लागू हो सकती हैं।

हालांकि जिन देशों को पहले से अमेरिकी AI चिप्स प्राप्त करने से प्रतिबंधित किया गया है, उनके लिए नियमों में कोई बदलाव प्रस्तावित नहीं है। चीन के खिलाफ निर्यात नियंत्रण भी काफी हद तक यथावत बने हुए हैं, हालांकि दिसंबर में बीजिंग को कुछ विशेष शर्तों के तहत एनवीडिया से सीमित AI चिप्स खरीदने की सशर्त अनुमति दी गई थी।

दस्तावेज के अनुसार, 1,000 से कम चिप्स वाले छोटे इंस्टॉलेशन के लिए भी निर्यात लाइसेंस की आवश्यकता पड़ सकती है। ऐसी स्थिति में एनवीडिया या एडवांस्ड माइक्रो डिवाइसेस जैसी कंपनियों को चिप्स के उपयोग की निगरानी करनी होगी और प्राप्त करने वाले पक्ष को ऐसे सॉफ्टवेयर लगाने होंगे जो चिप्स को बड़े क्लस्टर में जोड़ने से रोकें। यही क्लस्टर उन्नत AI सुपरकंप्यूटर बनाने में उपयोग होते हैं।

मसौदे के अनुसार 1 लाख तक चिप्स की आपूर्ति चाहने वाली विदेशी कंपनियों को भी सरकार के उच्च स्तर पर उपयोग से जुड़े आश्वासन देने पड़ सकते हैं। इससे बड़े इंस्टॉलेशन, यानी 2 लाख चिप्स तक की परियोजनाओं में अमेरिकी निर्यात नियंत्रण अधिकारियों द्वारा साइट निरीक्षण भी किया जा सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार,  “यह नियम US सरकार को चीन में चिप डायवर्जन से निपटने और सबसे शक्तिशाली AI सुपरकंप्यूटर के ज़्यादा सुरक्षित निर्माण को पक्का करने में मदद कर सकता है।” हालांकि उन्होंने चेतावनी भी दी कि “लाइसेंस की ज़रूरतें बहुत ज़्यादा हैं, जो दुनिया भर में लागू होती हैं, जिससे यह चिंता बढ़ रही है कि सरकार इन कंट्रोल्स का इस्तेमाल सिर्फ़ सिक्योरिटी के लिए नहीं, बल्कि सहयोगियों के साथ बातचीत में फ़ायदे के तौर पर करना चाहती है।”

अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने सोशल मीडिया मंच X पर पुष्टि की कि नए निर्यात नियमों पर चर्चा जारी है, लेकिन यह स्पष्ट किया कि वे बाइडेन प्रशासन के प्रस्तावित ‘बोझिल, अतिक्रमणकारी और विनाशकारी’ मॉडल को नहीं दोहराएंगे। अधिकारियों के अनुसार भविष्य में ऐसा मॉडल अपनाया जा सकता है जैसा सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के साथ समझौतों में किया गया है, जहां इन देशों ने उन्नत अमेरिकी चिप्स की पहुंच के बदले अमेरिका के तकनीकी ढांचे में निवेश करने पर सहमति दी है।

दिलचस्प बात यह है कि मौजूदा मसौदे में मॉडल वेट्स पर किसी प्रकार के निर्यात नियंत्रण का उल्लेख नहीं है। ये AI सिस्टम के संचालन को निर्धारित करने वाले अहम पैरामीटर होते हैं और तकनीकी कंपनियां इन्हें अत्यंत संवेदनशील बौद्धिक संपदा मानती हैं।

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