अर्ध मत्स्येंद्रासन रीढ़ की हड्डी को लचीला और मजबूत बनाता है, कमर और पीठ के निचले हिस्से की मांसपेशियों को मजबूती देता है, पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है और कब्ज जैसी समस्याओं में राहत देता है। इसके अभ्यास से पेट के अंगों को मसाज मिलती है जिससे भोजन अच्छे से पचता है, शरीर में संतुलन बढ़ाता है। यही नहीं, तनाव कम कर मन को शांत रखता है और डायबिटीज कंट्रोल में भी मदद करता है।
अर्ध मत्स्येंद्रासन को ‘हाफ स्पाइनल ट्विस्ट पोज’ के नाम से भी जाना जाता है। इसमें शरीर को घुमाकर रीढ़ को मोड़ दिया जाता है, जिससे रीढ़ की हर हड्डी को व्यायाम मिलता है। इसके नियमित अभ्यास से रीढ़ की कमजोरी, धीमी पाचन प्रक्रिया और ब्लड शुगर से जुड़ी परेशानियों में सुधार आता है।
मंत्रालय सभी उम्र के लोगों से अपील करता है कि वे इस आसन को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। हालांकि कुछ सावधानी बरतनी भी जरूरी है। गर्भवती महिलाएं, हर्निया या गंभीर पीठ समस्या वाले लोग इस आसन को डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह से ही करें।
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