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Wednesday, June 3, 2026
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मट्ठे के आलू: पेट के लिए फायदेमंद, अब Gen Z ट्विस्ट!

एक न्यूट्रिशनिस्ट बताती हैं कि आलू उन खाद्य पदार्थों में से एक है जिसे सबसे ज्यादा गलत समझा जाता है।

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उत्तर प्रदेश की प्रसिद्ध डिश ‘मट्ठे के आलू’ न केवल स्वादिष्ट है, बल्कि आंतों (गट) के स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभकारी मानी जाती है। एक​ प्रसिद्ध​ न्यूट्रिशनिस्ट के​ अनुसार इसकी आसान रेसिपी साझा करते हुए बताया कि यह व्यंजन यूपी में काफी लोकप्रिय है।

उन्होंने लिखा, “मट्ठे के आलू (यूपी स्टाइल मट्ठा आलू) एक सुकून देने वाली, ठंडक पहुंचाने वाली और गट-फ्रेंडली डिश है, जिसका स्वाद सादे चावल के साथ सबसे अच्छा लगता है। इसे मेरी मां के तरीके से बनाकर देखें, आपको जरूर पसंद आएगी। न्यूट्रिशन वीक के अवसर पर मैंने आलू से जुड़े कुछ भ्रम भी दूर किए हैं।”

आलू को लेकर सबसे बड़ा भ्रम

इस विषय पर मानव रचना इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड स्टडीज में न्यूट्रिशन एवं डाइटेटिक्स की प्रोफेसर प्रतिभा सिंह ने कहा कि आलू सबसे ज्यादा गलत समझे जाने वाले खाद्य पदार्थों में से एक है।

​जानकारी के अनुसार “उबला हुआ आलू वास्तव में कम वसा वाला होता है और इसमें जटिल कार्बोहाइड्रेट, पोटैशियम, विटामिन-सी तथा रेजिस्टेंट स्टार्च प्रचुर मात्रा में होता है। रेजिस्टेंट स्टार्च आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देता है और ऊर्जा के स्तर को स्थिर बनाए रखने में मदद करता है। आलू को अस्वास्थ्यकर बनाने वाला तत्व उसका डीप फ्राई होना और अत्यधिक नमक का उपयोग है, न कि आलू स्वयं।”

मट्ठे के आलू जैसी डिश में जब आलू को उबालकर प्रोबायोटिक युक्त मट्ठे (छाछ) और हल्के मसालों के साथ पकाया जाता है, तो यह एक पौष्टिक और हल्का भोजन बन जाता है।

इस व्यंजन का प्रत्येक घटक पाचन तंत्र को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है​:-

छाछ (मट्ठा): इसमें मौजूद जीवित लाभकारी बैक्टीरिया आंतों के माइक्रोबायोटा को बेहतर बनाते हैं और एसिडिटी कम करने में मदद करते हैं।

घी: इसमें ब्यूटिरेट जैसे शॉर्ट-चेन फैटी एसिड होते हैं, जो आंतों की भीतरी परत को पोषण देते हैं।

मेथी: पित्त के प्रवाह और रक्त शर्करा संतुलन में सहायक।
 
हींग: गैस और पेट फूलने की समस्या कम करती है तथा पाचन एंजाइमों को सक्रिय करती है।

हल्दी: इसमें मौजूद करक्यूमिन शक्तिशाली एंटी-इन्फ्लेमेटरी और प्रीबायोटिक गुणों से भरपूर होता है।​ ये सभी तत्व मिलकर पाचन को बेहतर बनाते हैं और आंतों को मजबूत बनाने में सहायता करते हैं।

आधुनिक खानपान में भी फिट बैठती है यह डिश

भारतीय पारंपरिक व्यंजन स्वाभाविक रूप से लचीले और पोषण-संतुलित होते हैं। मट्ठे के आलू एक प्लांट-फॉरवर्ड डाइट का बेहतरीन उदाहरण हैं क्योंकि यह शाकाहारी, प्रोबायोटिक युक्त और बिना प्रोसेस्ड सामग्री के तैयार की जाती है।

यदि इसे सलाद या बाजरे की रोटी जैसे फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों के साथ खाया जाए, तो यह कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स (Low-GI) और संतुलित कार्बोहाइड्रेट वाले भोजन का हिस्सा बन सकती है।

मट्ठे के आलू के लिए​ सामग्री :​-

उबले हुए आलू
छाछ (मट्ठा)
घी (वैकल्पिक)
मेथी
हींग
हल्दी
ताजी हरी जड़ी-बूटियां (धनिया, पुदीना आदि)

सलाद के लिए:​-

लेट्यूस और पालक जैसी मिक्स्ड ग्रीन्स
खीरा, गाजर, शिमला मिर्च जैसी कटी हुई सब्जियां
अखरोट, बादाम, कद्दू के बीज
नींबू का रस, ऑलिव ऑयल और शहद से बना ड्रेसिंग

बनाने की विधि​:-

सबसे पहले सामान्य तरीके से मट्ठे के आलू तैयार करें।
इसमें कटी हुई सब्जियां, मिक्स्ड ग्रीन्स और मेवे/बीज मिलाएं।
ऊपर से सिट्रस-हर्ब ड्रेसिंग डालें।
ताजा धनिया या पुदीने से सजाकर परोसें।

उपयोगी सुझाव​:-

अपनी पसंद की सब्जियां और मेवे शामिल कर सकते हैं।
ड्रेसिंग की मात्रा स्वादानुसार रखें।
अतिरिक्त पोषण के लिए ग्रिल्ड चिकन या टोफू भी मिला सकते हैं।

इस तरह पारंपरिक मट्ठे के आलू आधुनिक पोषण विज्ञान और भारतीय खानपान की विरासत का शानदार मेल प्रस्तुत करते हैं।

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