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चतुरंग दंडासन से शरीर में तेज होता है ब्लड सर्कुलेशन, दूर होती है सुस्ती!

चतुरंग दंडासन देखने में पुशअप जैसा लगता है। इस आसन में शरीर को सीधा रखते हुए हाथों और पैरों की उंगलियों पर संतुलन बनाया जाता है।

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आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में खराब खानपान, घंटों बैठे रहना और शारीरिक गतिविधियों की कमी लोगों की सेहत पर बुरा असर डाल रही है। इसकी वजह से शरीर में थकान, सुस्ती, मांसपेशियों में जकड़न और ब्लड सर्कुलेशन से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। योग में कई ऐसे आसन बताए गए हैं जो शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। इन्हीं में से एक है चतुरंग दंडासन।

चतुरंग दंडासन देखने में पुशअप जैसा लगता है। इस आसन में शरीर को सीधा रखते हुए हाथों और पैरों की उंगलियों पर संतुलन बनाया जाता है। जब शरीर इस स्थिति में रहता है तो शरीर की कई मांसपेशियां एक साथ काम करने लगती हैं। इससे शरीर में खून का बहाव तेज होता है और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर बनने लगता है।

चतुरंग दंडासन खासकर पैरों और शरीर के निचले हिस्से में ब्लड फ्लो को बेहतर करने में मदद करता है। जब शरीर का वजन हाथों और पैरों पर आता है तो खून तेजी से पूरे शरीर में घूमने लगता है। इससे शरीर में सुस्ती कम होती है और इंसान खुद को ज्यादा तरोताजा महसूस करता है। जो लोग लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करते हैं, उनके लिए यह आसन काफी फायदेमंद माना जाता है।

यह योगासन शरीर को मजबूत बनाने में भी मदद करता है। इसे करने से हाथ, कंधे, पीठ और पेट की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। साथ ही पेट की मांसपेशियां भी टोन होने लगती हैं।

चतुरंग दंडासन शरीर के पोश्चर को भी बेहतर बनाता है। आजकल कई लोग घंटों झुककर मोबाइल या लैपटॉप इस्तेमाल करते हैं, जिससे पीठ और गर्दन पर बुरा असर पड़ता है। यह आसन रीढ़ की हड्डी और पीठ की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करता है। इससे शरीर सीधा रखने में आसानी होती है और पोश्चर सुधरने लगता है।

यह योगासन मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा है। इस आसन को करते समय सांसों पर ध्यान दिया जाता है, इससे मन धीरे-धीरे शांत होने लगता है और तनाव कम होता है। नियमित अभ्यास से मन ज्यादा शांत और फोकस्ड महसूस कर सकता है।

इस आसन को करने के लिए दोनों हाथों को कंधों के पास जमीन पर रखें। अब पैरों की उंगलियों को जमीन पर टिकाएं और धीरे-धीरे शरीर को ऊपर उठाएं। ध्यान रखें कि शरीर सिर से लेकर पैर तक सीधा रहे। इस दौरान शरीर का वजन हाथों और पैरों की उंगलियों पर रहेगा। शुरुआत में इस मुद्रा में 10 से 20 सेकंड तक रुक सकते हैं। धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ने पर समय भी बढ़ाया जा सकता है।

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